Totapari Mango: अगर आप अपने फार्म हाउस को एक प्रॉफिटेबल बिजनेस में बदलना चाहते हैं तो तोतापरी आम की बागवानी एक बढ़िया ऑप्शन साबित हो सकती है. तोतापरी जिसे इसके तोते जैसी चोंच वाले शेप के चलते कली मुक्कू भी कहा जाता है. यह अपनी जबरदस्त पैदावार और कम देख-रेख के लिए मशहूर है. आज के समय में जब पल्प इंडस्ट्री और एक्सपोर्ट की डिमांड बढ़ रही है.
ऐसे में तोतापरी उगाकर किसान भाई मोटी कमाई कर सकते हैं. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह हर साल फल देता है और बाकी दूसरी वैरायटी के मुकाबले बीमारियों के प्रति ज्यादा रेजिस्टेंट है जिससे किसानों का रिस्क काफी कम हो जाता है. जान लीजिए इसे उगाने का सही तरीका.
ऐसे उगाएं तोतापरी आम
तोतापरी आम उगाने के लिए सबसे पहले सही जमीन और मौसम का चुनाव करना जरूरी है. यह किस्म खास तौर पर उष्णकटिबंधीय (Tropical) और उपोष्णकटिबंधीय जलवायु में फलती-फूलती है. जहां तापमान 21 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच रहे. मिट्टी की बात करें तो दोमट मिट्टी जिसमें जल निकासी की अच्छी व्यवस्था हो इसके लिए सबसे बेहतर मानी जाती है.
गड्ढे तैयार करते समय 1 मीटर गहरा और 1 मीटर चौड़ा आकार रखें और उसे गोबर की खाद और मिट्टी के मिश्रण से भरें. मानसून का मौसम यानी जून से अगस्त के बीच का समय इसकी प्लांटिंग के लिए सबसे सही रहता है जिससे जड़ों को सही नमी मिल सके.
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इस तरीके से लगाएं पेड़
आजकल फार्म हाउस में अल्ट्रा हाई डेंसिटी प्लांटिंग का चलन बढ़ा है जिससे कम जगह में ज्यादा पेड़ लगाए जा सकते हैं. पारंपरिक तरीके में जहां पेड़ 10-10 मीटर की दूरी पर लगते थे. वहीं मॉडर्न तकनीक में आप 3×2 मीटर की दूरी पर भी इन्हें लगा सकते हैं.
समय पर करें सिंचाई
सिंचाई के लिए ड्रिप इरिगेशन यानी टपक सिंचाई सबसे बेस्ट है. जो पानी बचाने के साथ-साथ पौधों को जरूरी नमी भी प्रदान करती है. छोटे पौधों को शुरुआत में हर 2-3 दिन में पानी देना चाहिए. जबकि बड़े पेड़ों को फल आने के समय नमी की ज्यादा जरूरत होती है. नियमित कटाई-छंटाई से पेड़ों का शेप सही रहता है और फलों की क्वालिटी सुधरती है.
इतनी हो सकती है कमाई
तोतापरी आम की बागवानी में कमाई का मुख्य जरिया इसकी हाई यील्डिंग कैपेसिटी है. एक मैच्योर पेड़ सालाना 150 से 250 किलो तक फल दे सकता है जो अन्य किस्मों से कहीं ज्यादा है. बाजार में इसकी मांग केवल ताजे फल के तौर पर ही नहीं होती है.
बल्कि जूस, मैंगो शेक, जैम और पल्प बनाने वाली कंपनियों में बहुत ज्यादा रहती है. चूँकि इसमें पल्प की मात्रा ज्यादा और गुठली छोटी होती है. इसलिए फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स इसे हाथों-हाथ खरीदती हैं. एक एकड़ के बाग से लाखों का मुनाफा कमाया जा सकता है.
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