Sunday, May 17, 2026
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Weak Monsoon Impact El Nino 2026 : इस बार कमजोर मानसून बन सकता है किसानों की बड़ी चुनौती, ऐसे करेंगे खेती तो नहीं होगी दिक्कत


Weak Monsoon Impact El Nino 2026  : भारत में हर साल लाखों किसान अपनी फसलों की बुवाई और उत्पादन के लिए बारिश पर निर्भर रहते हैं, लेकिन साल 2026 में एक नई चिंता ने किसानों और विशेषज्ञों की परेशानी बढ़ा दी है. इस नई चिंता का नाम एल नीनो (El Niño) है.  यह एक वैश्विक जलवायु घटना है, जो प्रशांत महासागर के तापमान में असामान्य वृद्धि से जुड़ी होती है और इसका सीधा असर भारत के मानसून और खेती पर पड़ता है.

मौसम विशेषज्ञों और कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक, अगर इस साल एल नीनो मजबूत होता है, तो मानसून कमजोर रह सकता है. इसका मतलब कम बारिश, बढ़ता तापमान और सूखे जैसी परिस्थितियां है. ऐसे में किसानों की खेती, उत्पादन और आय तीनों पर असर पड़ सकता है. अगर एल नीनो के कारण उत्पादन घटता है, तो सब्जियों और कपास जैसी वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं. इसका असर आम जनता की थाली और आर्थिक स्थिति पर भी पड़ेगा. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस बार कमजोर मानसून किसानों की बड़ी चुनौती कैसे बन सकता है और खेती कैसे करें, जिससे कोई दिक्कत न हो. 

इस बार कमजोर मानसून किसानों की बड़ी चुनौती कैसे बन सकता है?

इस बार कमजोर मानसून किसानों की बड़ी चुनौती एल नीनो के कारण बन सकता है. एल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र का तापमान सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है. यह सिर्फ समुद्र तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरे मौसम को प्रभावित करता है. इसके कारण भारत में मानसून कमजोर हो सकता है, बारिश कम होगी और तापमान बढ़ सकता है. साथ ही वैश्विक असर भी होता है. जिसमें दुनिया के कई हिस्सों में सूखा, बाढ़ या तूफान जैसी परेशानियां देखने को मिल सकती हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार मई से जुलाई 2026 के बीच एल नीनो बनने की संभावना लगभग 82 प्रतिशत है, जबकि दिसंबर 2026 तक बने रहने की संभावना 96 प्रतिशत है. 

 खरीफ फसलों पर कैसे होगा असर?

खरीफ सीजन की मुख्य फसलें जैसे धान, गन्ना, मक्का और कपास ज्यादा पानी मांगती हैं. कमजोर मानसून या बीच-बीच में लंबी सूखी अवधि से इन फसलों की बुवाई और पैदावार प्रभावित हो सकती है. कम बारिश के कारण धान और गन्ना की पैदावार घट सकती है. वहीं पानी की कमी से मक्का और कपास  का उत्पादन प्रभावित होगा. इसके अलावा दक्षिण भारत में कई किसान पहले से भूजल और सिंचाई के सहारे जल्दी बुवाई कर रहे हैं. 

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खेती कैसे करें, जिससे कोई दिक्कत न हो

कृषि और मौसम विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसान पारंपरिक खेती छोड़कर मौसम के अनुसार रणनीति अपनाएं. जिसमें कम पानी वाली फसलें. जैसे मोटे अनाज, दालें और सूखा सहन करने वाली किस्में इस साल बेहतर ऑप्शन हैं. इसके अलावा माइक्रो इरिगेशन का यूज करें. ड्रिप इरिगेशन, स्प्रिंकलर और मल्चिंग जैसी तकनीकें पानी बचाने में मदद करती हैं. साथ ही खेत में नमी बनाए रखना, जैविक पदार्थ डालना और सुबह-शाम सिंचाई करना सही रहेगा. असम और ओडिशा के कई किसान रेजिलिएंस प्रोजेक्ट के तहत आधुनिक सिंचाई तकनीकें अपनाकर अपने खेतों में पानी की बचत कर रहे हैं और उत्पादन भी बढ़ा रहे हैं. 

समय रहते क्या करें तैयारी?

इस साल का मौसम चुनौतीपूर्ण रहने वाला है. ऐसे में किसानों के लिए सबसे जरूरी कदम मौसम आधारित खेती अपनाना, इसके अलावा सही समय पर बुवाई करना और कम पानी वाली फसलों की ओर बढ़ना, साथ ही जल संरक्षण और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेती करना है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते तैयारी की जाए तो एल नीनो के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है. 

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