Paddy Seeds Purification: धान की सीजन शुरू होते ही हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है फसल को बीमारियों से बचाना. अगर शुरुआत में ही बीज का सही इलाज न किया जाए तो आगे चलकर पूरी फसल बर्बाद होने का खतरा रहता है. इसलिए धान की बुवाई से पहले बीजों को शुद्ध करने के सबसे आसान और असरदार घरेलू तरीके के बारे में. इस जादुई और बेहद सस्ते नुस्खे के लिए आपको बाजार से कोई महंगी दवा खरीदने की बिल्कुल जरूरत नहीं है.
बल्कि आपके रसोई घर में मौजूद साधारण नमक ही आपकी इस बड़ी समस्या को चुटकियों में हल कर देगा. नमक के पानी से बीजों को उपचारित करने का यह तरीका सदियों पुराना है लेकिन आज के समय में भी उतना ही कारगर है. अगर आप इस तरीके से बीजों की सफाई कर लेते हैं तो आपकी फसल में फंगस और बैक्टीरिया से होने वाली खतरनाक बीमारियां लगने का चांस बिल्कुल खत्म हो जाता है. जान लीजिए पूरा तरीका.
नमक से इस तरह बीजों को करें शुद्ध
धान के बीजों को शुद्ध करने के लिए आपको सबसे पहले एक बड़े बर्तन या टब में साफ पानी लेना होगा. अब इस पानी में आपको साधारण नमक मिलाना है और तब तक घोलना है जब तक कि नमक पूरी तरह पानी में मिक्स न हो जाए. इसका एक बढ़िया पैमाना यह है कि पानी में एक साफ अंडा डालकर देखें. अगर अंडा तैरने लगे तो समझें घोल एकदम परफेक्ट तैयार है.
इसके बाद आप धान के बीजों को इस नमक वाले पानी में डाल दें और अच्छी तरह से हाथों से हिलाएं. आप देखेंगे कि जो बीज अंदर से खोखले, हल्के या बीमारी से प्रभावित हैं वे तुरंत पानी के ऊपर तैरने लगेंगे. वहीं जो बीज पूरी तरह स्वस्थ, भारी और दमदार हैं वे पानी की तली में नीचे बैठ जाएंगे. ऊपर तैरने वाले सभी खराब और कचरा बीजों को छानकर तुरंत बाहर फेंक दें.
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साफ बीजों की धुलाई और सुखाने का सही तरीका
अब जो सही और भारी बीज नीचे बैठ गए हैं उन्हें पानी से बाहर निकाल लें और तुरंत दो से तीन बार साफ पानी से अच्छी तरह धो लें. बीजों को धोना बहुत जरूरी है ताकि उनके ऊपर लगी नमक की परत पूरी तरह साफ हो जाए, नहीं तो नमक बीजों के अंकुरण को रोक सकता है. इसके बाद इन धुले हुए बीजों को किसी सूती कपड़े या चटाई पर फैलाकर छांव में अच्छी तरह सुखा लें.
याद रखें कि इन्हें तेज धूप में सीधा नहीं सुखाना है बल्कि हवादार छांव में ही सुखाना सबसे बेस्ट रहता है. जब बीजों की नमी पूरी तरह खत्म हो जाए तब ये बुवाई या नर्सरी तैयार करने के लिए एकदम परफेक्ट हो जाते हैं. इस आसान तरीके को अपनाकर हमारे किसान भाई अपनी लागत भी बचा सकते हैं और फसल की छप्परफाड़ पैदावार पा सकते हैं.
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