Kharif Season Farming: भारत में मानसून का मौसम शुरू होते ही खरीफ सीजन की तैयारी भी तेज हो जाती है. देश के कृषि व्यवस्था में खरीफ फसलों का बहुत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है. क्योंकि धान, मक्का, सोयाबीन, कपास, बाजार और दालों जैसी कई प्रमुख फसले इसी दौरान उगाई जाती हैं. इन फसलों का सीधा असर किसानों की आय और देश के खाद्यान्न उत्पादन पर पड़ता है.
इस बार भी खरीफ सीजन को लेकर सरकार और कृषि विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी है. किसानों को बीज, उर्वरक और नई तकनीक की जानकारी देने के लिए कई योजनाएं लागू की जा रही हैं. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि खरीफ सीजन कब से शुरू हो रहा है और इसमें कौन-कौन सी फसलों की बुवाई किसान कर सकते हैं.
क्या होती है खरीफ फसलें?
खरीफ फसलें वे फसलें होती है, जिनकी बुवाई मानसून के आगमन के साथ की जाती है. आमतौर पर जून और जुलाई में इनकी बुवाई शुरू होती है, जबकि सितंबर और अक्टूबर के बीच इनकी कटाई की जाती है. इन फसलों को अच्छी बारिश, गर्म मौसम और अधिक नमी की जरूरत होती है. यही वजह है कि यह खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर मानी जाती है. भारत में खरीफ सीजन दक्षिणी-पश्चिमी मानसून के साथ जून में शुरू होता है और अक्टूबर तक चलता है. कुछ फसलों जैसे कपास और गन्ने की कटाई नवंबर-दिसंबर तक भी जारी रहती है.
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खरीफ सीजन में कौन-कौन सी फसलें उगाई जाती है?
देशभर में किसान खरीफ सीजन के दौरान कई तरह की फसलों की खेती करते हैं. इनमें धान सबसे प्रमुख फसल मानी जाती है. इसके अलावा मक्का, बाजरा, ज्वार, रागी, सोयाबीन, कपास, मूंगफली, तिलहन, सूरजमुखी, उड़द, मूंग और अरहर जैसी फसलें भी बड़े स्तर पर बोई जाती है. मोटे अनाज यानी श्री अन्न की खेती को भी अब लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है. बाजरा, ज्वार, रागी, सांवा और कोदो जैसी फसलों की मांग बढ़ाने के साथ-साथ सरकार भी किसानों को उनकी खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है.
खरीफ फसलों के लिए कैसा मौसम जरूरी?
खरीफ फसलों की अच्छी पैदावार के लिए 25 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त माना जाता है. इन फसलों को ज्यादा बारिश और नमी की जरूरत होती है. यही कारण है कि मानसून में देरी या कम बारिश का सीधा असर खरीफ उत्पादन पर पड़ता है. एक्सपर्ट के अनुसार अच्छी बुवाई के लिए किसानों को मानसून और मौसम के पूर्वानुमान पर नजर रखनी चाहिए. सही समय पर बुवाई होने से फसल वृद्धि बेहतर होती है और उत्पादन बढ़ने की संभावना रहती है.
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