Himsagar Mango Farming: गर्मियों का मौसम चल रहा है और इस मौसम में बाजार में आम की बहार देखने को मिल रही है. दशहरी, लंगड़ा, चौसा और अल्फांसो जैसी किस्मों के बीच इस बार पश्चिम बंगाल का हिमसागर आम भी सबसे ज्यादा चर्चा में है. अपने जबरदस्त रेशा रहित गुदे और तेज खुशबू की वजह से इसे आमों का कोहिनूर भी कहा जाता है. यही कारण है कि यह किस्म अब सिर्फ पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रही है, बल्कि बिहार समेत दूसरे राज्यों के किसान भी इसकी बागवानी की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि आप फार्म हाउस पर हिमसागर मैंगो कैसे उगा सकते हैं और यह यह आम कितने रुपये किलो बिकता है.
क्या खास है हिमसागर आम में?
हिमसागर आम की सबसे बड़ी खासियत पूरी तरह रेशा रहित होना है. इसका गूदा बहुत मुलायम और रसदार होता है जो मुंह में आते ही घुल जाता है. इसकी खुशबू इतनी तेज होती है कि दूर से ही इसकी पहचान हो जाती है. यही वजह है कि बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. 1 किलो में इस किस्म के सिर्फ तीन से चार आम ही आते हैं. मई के आखिर से जून तक इसका सीजन रहता है और इसी दौरान मंडियों में इसकी सबसे ज्यादा बिक्री होती है. कई विक्रेता बताते हैं कि ग्राहक खासतौर पर हिमसागर आम की मांग करते हैं और दूसरे आमों की तुलना में इसकी कीमत भी ज्यादा मिलती है.
हिमसागर आम की खेती के लिए क्या जरूरी?
हिमसागर आम की खेती के लिए गर्म और आर्द्र जलवायु सबसे उपयुक्त मानी जाती है. अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी में इसके पौधे बेहतर बढ़ते हैं और खेत में पानी जमा नहीं होना चाहिए. क्योंकि जलभराव से जड़ें खराब होने का खतरा रहता है. किसानों के अनुसार मानसून की शुरुआत में पौधा रोपण करना सबसे अच्छा माना जाता है. बारिश वाले क्षेत्रों में जुलाई-अगस्त के दौरान रोपाई की जाती है, जबकि सिंचाई वाले इलाकों में फरवरी- मार्च में भी पौधे लगाए जा सकते हैं. वहीं हिमसागर आम के पौधे को पर्याप्त जगह देना जरूरी होता है. आमतौर पर पौधे के बीच 10 से 10 मीटर की दूरी रखी जाती है, ताकि पेड़ अच्छी तरह फैल सके. वहीं खेत तैयार करते समय मिट्टी की गहरी जुताई कर उसमें गोबर की खाद मिलाई जाती है.
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हिमसागर की सिंचाई और देखभाल कैसे करें?
शुरुआती वर्षों में हिमसागर पौधे को नियमित और हल्की सिंचाई की जरूरत होती है. गर्मियों में 5 से 7 दिन के अंतराल में पानी देना बेहतर माना जाता है, जिनका सर्दियों में सिंचाई का अंतराल बढ़ाया जा सकता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार ज्यादा सिंचाई की बजाय हल्की सिंचाई ज्यादा फायदेमंद रहती है. इस आम के पौधे में किसानों को समय समय पर जैविक खाद, नीम खली और जरूरी उर्वरकों का इस्तेमाल भी करना चाहिए. फूल आने से पहले रेतीली मिट्टी में यूरिया के छिड़काव की भी सलाह दी जाती है. इसके अलावा अगर फल की बात करें तो ग्राफ्टेड यानी कलमी पौधे आमतौर पर 3 से 5 साल में फल देना शुरू कर देते हैं. शुरुआत में एक पेड़ से 10 से 20 फल मिल सकते हैं, लेकिन जैसे-जैसे पेड़ बड़ा होता है उत्पादन तेजी से बढ़ता जाता है.
बाजार में कितने रुपये में मिलता है यह आम?
हिमसागर आम की मांग बाजार में काफी ज्यादा रहती है. इसकी गुणवत्ता और स्वाद की वजह से यह सामान्य आमों की तुलना में महंगे दाम पर बिकते हैं. कई जगह पर इसकी कीमत पर 150 रुपये से लेकर 300 रुपये किलो तक पहुंच जाती है. वहीं ऑर्गेनिक तरीके से उगाए गए हिमसागर आम की कीमत इससे भी ज्यादा मिल सकती है.
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