Wednesday, May 20, 2026
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इस घास से बढ़ जाएगी पशुओं के दूध देने की क्षमता, सेहत में भी होगा जबरदस्त इजाफा


Shankar Napier Grass: पशुपालन और डेयरी फार्मिंग के इस मॉडर्न दौर में हर पशुपालक का एक ही टारगेट होता है और वह है कम खर्च में पशुओं से ज्यादा और हाई-क्वालिटी दूध कैसे हासिल किया जाए. अक्सर लोग महंगे फीड्स और सप्लीमेंट्स के पीछे भागते हैं. जिससे उनका मुनाफा कम हो जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक खास किस्म का हरा चारा यानी शंकर नेपियर घास इस समस्या का सबसे बेस्ट और नेचुरल सॉल्यूशन है. 

इस न्यूट्रिएंट्स से भरपूर घास को डाइट में शामिल करते ही दूध देने वाले पशुओं की कैपेसिटी में जादुई बदलाव देखने को मिलता है. सबसे अच्छी बात यह है कि यह घास सिर्फ दूध ही नहीं बढ़ाती बल्कि मवेशियों की ओवरऑल हेल्थ को भी एकदम परफेक्ट रखती है. चलिए आपको बताते हैं कि कैसे यह चमत्कारी घास काम करती है और इसके क्या फायदे हैं.

दूध प्रोडक्शन में होती है बढ़ोतरी

शंकर नेपियर घास आम चारे के मुकाबले पशुओं के लिए किसी सुपरफूड से कम नहीं है. इसमें प्रोटीन, कैल्शियम और जरूरी मिनरल्स बहुत अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं जो दुधारू पशुओं के शरीर की पोषण संबंधी जरूरतों को आसानी से पूरा कर देते हैं. जब गाय और भैंस को यह स्वादिष्ट और रसीला चारा लगातार दिया जाता है तो उनके दूध देने की क्षमता में लगभग 20 से 30 परसेंट तक का जबरदस्त इजाफा होता है.

घास की खासियत

इस घास की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बेहद सुपाच्य होती है यानी पशु इसे बहुत चाव से खाते हैं और आसानी से पचा लेते हैं. इसके रेगुलर इस्तेमाल से दूध का गाढ़ापन और फैट कंटेंट भी काफी सुधर जाता है. जिससे मार्केट में पशुपालकों को दूध के बेहतरीन दाम मिलते हैं.

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पशुओं की सेहत रहती है अच्छी 

यह घास न सिर्फ दूध का बिजनेस चमकाती है बल्कि पशुओं की इम्युनिटी को भी नेक्स्ट लेवल पर ले जाती है. शंकर नेपियर घास में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स और न्यूट्रिएंट्स पशुओं को मौसमी बीमारियों और पेट के इन्फेक्शन से बचाकर रखते हैं जिससे डॉक्टर का खर्च बचता है. 

किसानों का खर्चा बचता है

अगर किसानों के नजरिए से देखें तो यह घास एक बार लगाने के बाद कई सालों तक लगातार हरा चारा देती रहती है और इसकी ग्रोथ भी बहुत तेजी से होती है. कम पानी और सामान्य देखभाल में भी यह बंपर पैदावार देती है जिससे महंगे कमर्शियल फीड्स पर होने वाला एक्स्ट्रा खर्च पूरी तरह बंद हो जाता है. कुल मिलाकर यह घास पशुओं की सेहत को तो दुरुस्त रखती ही है तो इसके साथ ही डेयरी फार्मर्स के मुनाफे को भी काफी ज्यादा बढ़ा देती है.

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