Friday, May 22, 2026
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अब फसल खराब होने पर घबराना नहीं, ये राज्य सरकार किसानों को देगी 11 हजार करोड़ की सुरक्षा


MP Government Fasal Bima Yojana:  मौसम के बदलते मिजाज और प्राकृतिक आपदाओं की वजह से फसलों का बर्बाद होना किसानों के लिए सबसे बड़ा दर्द रहा है. लेकिन अब मध्य प्रदेश के किसानों को इस बात की चिंता करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. राज्य की मोहन यादव सरकार ने किसान कल्याण वर्ष के मौके पर अन्नदाताओं को एक बहुत बड़ा सुरक्षा कवच देने का फैसला किया है. 

सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को अगले 5 सालों के लिए बढ़ाने की मंजूरी दे दी है और इसके लिए 11,608.47 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट तय किया है. इसका मतलब यह है कि अगर मौसम की बेरुखी से फसलों को कोई भी नुकसान पहुंचता है तो उसकी भरपाई सरकार करेगी. इस फैसले से राज्य के लाखों किसानों को आर्थिक मजबूती मिलेगी. जानें पूरी खबर.

एमपी सरकार ने 11 करोड़ का बजट रखा

मध्य प्रदेश कैबिनेट की बैठक में लिए गए इस फैसले के मुताबिक साल 2026-27 से लेकर 2030-31 तक यानी पूरे 5 सालों के लिए फसल बीमा योजना का यह सुरक्षा चक्र चालू रहेगा. सरकार ने इसके लिए कुल 11 हजार करोड़ से ज्यादा की रकम रिजर्व की है जिससे किसी भी मुश्किल परिस्थिति में किसानों को तुरंत मदद पहुंचाई जा सके. 

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नुकसान की भरपाई की गारंटी

सरकार ने सभी फसलों के लिए इंडेमनिटी लेवल यानी नुकसान की भरपाई का स्तर 80 फीसदी तय किया है जो आगे भी ऐसे ही जारी रहेगा. इसके अलावा इस योजना को और बेहतर तरीके से लागू करने के लिए सरकार दो अलग-अलग मॉडल्स पर विचार कर रही है. जिससे बीमा कंपनियों और सरकार के बीच क्लेम के पैसों का बंटवारा एकदम सही और पारदर्शी तरीके से हो सके.

टेक्नोलॉजी से होगा सटीक आकलन 

इस योजना की सबसे अच्छी बात यह है कि फसलों के नुकसान का अंदाजा लगाने के लिए पूरी तरह से आधुनिक टेक्नोलॉजी का सहारा लिया जा रहा है. मध्य प्रदेश सरकार सैटेलाइट, रिमोट सेंसिंग टेक्नोलॉजी और मौसम डेटा सिस्टम का इस्तेमाल कर रही है जिसके लिए इसरो के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर जैसी बड़ी संस्थाओं की मदद ली जा रही है. 

बस इतना प्रीमियम देना होगा

इस योजना के तहत किसानों को बहुत ही मामूली प्रीमियम देना पड़ता है, जैसे खरीफ फसलों के लिए सिर्फ 2 फीसदी, रबी फसलों के लिए 1.5 फीसदी और कमर्शियल या बागवानी फसलों के लिए केवल 5 फीसदी प्रीमियम देना होता है. बाकी का सारा खर्च केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उठाती हैं, जिससे छोटे और सीमांत किसानों की जेब पर बिल्कुल भी बोझ नहीं पड़ता और उन्हें पूरी सुरक्षा मिलती है.

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