Wednesday, June 10, 2026
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2 किलो धान से ही एक एकड़ में लग जाएगी फसल, इस तरीके से धान रोपें किसान भाई


Paddy Farming Tips: धान की पारंपरिक खेती में भारी मात्रा में बीजों का इस्तेमाल होता है जिससे किसानों की लागत बहुत बढ़ जाती है. लेकिन अब खेती के बदलते तौर-तरीकों और नई तकनीकों ने इस मुश्किल को काफी हद तक आसान कर दिया है. आज के इस आधुनिक दौर में धान की बुवाई की ऐसी शानदार तकनीकें आ चुकी हैं जिनकी मदद से महज 2 किलो बीज से ही पूरे एक एकड़ खेत में धान की रोपाई बहुत आराम से की जा सकती है.

यह तरीका न सिर्फ किसानों का पैसा बचाता है बल्कि फसल की क्वालिटी और पैदावार को भी कई गुना बेहतर बना देता है. स्मार्ट फार्मिंग के इस जमाने में कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाने का यह सबसे बेहतरीन फॉर्मूला साबित हो रहा है. इस वैज्ञानिक अप्रोच को अपनाकर किसान भाई अपनी मेहनत और समय दोनों की बड़ी बचत कर रहे हैं.

कम बीज में बंपर पैदावार देने वाली तकनीक

कम बीजों में पूरे एक एकड़ की रोपाई करने के लिए श्री विधि यानी सिस्टम ऑफ राइस इंटेंसिफिकेशन (SRI) तकनीक सबसे कारगर मानी जाती है. इस आधुनिक तरीके में पारंपरिक नर्सरी के मुकाबले बेहद कम जगह और बहुत कम बीजों की जरूरत होती है. श्री विधि से तैयार किए गए पौधों को खेत में एक निश्चित दूरी पर लगाया जाता है.

जिससे हर एक पौधे को हवा, धूप और पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मिलते हैं. दूरी सही होने के कारण पौधों की जड़ें गहराई तक जाती हैं और एक-एक पौधे से दर्जनों कल्ले निकलते हैं जो फसल को बेहद मजबूत और घनी बना देते हैं. इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें पानी की खपत भी काफी कम होती है और पैदावार सामान्य के मुकाबले बहुत ज्यादा मिलती है.

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जिंक सल्फेट का जरूरी इस्तेमाल

धान की इस आधुनिक रोपाई को कामयाब बनाने के लिए खेत की सही तैयारी और सही पोषक तत्व देना बेहद जरूरी होता है. खेत तैयार करते समय मिट्टी की जांच के हिसाब से जरूरी खाद के साथ जिंक सल्फेट का इस्तेमाल करना सबसे जरूरी स्टेप है. जिंक सल्फेट डालने से धान के पौधों में खैरा रोग लगने का खतरा पूरी तरह खत्म हो जाता है और पौधों में गजब की हरियाली देखने को मिलती है.

इन चीजों से भी होती है ग्रोथ

इसके अलावा संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का कॉम्बिनेशन पौधों की ग्रोथ को तेजी से बूस्ट करता है. जब मिट्टी को इस तरह के जरूरी न्यूट्रिएंट्स मिलते हैं तो महज 2 किलो बीज से तैयार की गई यह फसल भी कटाई के वक्त रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन देकर किसानों की जेब भर देती है.

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