Makhana Farming Tips: देश में आजकल किसान पारंपरिक फसलों के मुकाबले नकदी फसलों की तरफ ज्यादा रुझान ले रहे हैं. अगर आप भी कम लागत में किसी ऐसी खेती की तलाश में हैं जो आपके लिए कमाई के दरवाजे खोल दे तो मखाने की खेती आपके लिए सबसे बढ़िया विकल्प है. मखाने को इसके बेमिसाल फायदों और बाजार में मिलने वाली ऊंची कीमतों की वजह से वाइट गोल्ड यानी सफेद सोना भी कहा जाता है.
हेल्थ कॉन्शियस लोगों के बीच इसकी डिमांड देश ही नहीं बल्कि विदेशों में रहती है. सबसे अच्छी बात यह है कि इसकी खेती के लिए आपको बहुत ज्यादा उपजाऊ जमीन की जरूरत नहीं होती. आप अपने इलाके के जलजमाव वाले खेतों, गढ्ढों या तालाबों का इस्तेमाल करके हर सीजन में इससे लाखों रुपये का मोटा मुनाफा बेहद आसानी से कमा सकते हैं.
ऐसे करें नर्सरी की तैयारी
मखाने की खेती दो तरीकों से की जाती है एक पारंपरिक तालाब वाली विधि और दूसरी खेतों में जलजमाव करके की जाने वाली तकनीक. इसकी शुरुआत दिसंबर से जनवरी के महीने में नर्सरी तैयार करके की जाती है. नर्सरी में जब पौधे लगभग दो महीने के हो जाते हैं तब अप्रैल के आसपास इन्हें मुख्य खेत या तालाब में शिफ्ट कर दिया जाता है.
मखाने की बुआई का सही तरीका
मखाने के पौधों की बेहतर ग्रोथ के लिए खेत में कम से कम दो से तीन फीट पानी हमेशा भरा रहना जरूरी है. बुआई के समय प्रति हेक्टेयर के हिसाब से सही मात्रा में जैविक खाद और न्यूट्रिएंट्स का इस्तेमाल करने से पौधों की ग्रोथ बहुत तेजी से होती है.
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इतने समय में फसल तैयार
मखाने की फसल को पूरी तरह तैयार होने में लगभग 8 से 9 महीने का समय लगता है. अगस्त से सितंबर के बीच इसके फल पानी की सतह के नीचे बैठने लगते हैं. जिन्हें मजदूरों की मदद से बाहर निकाला जाता है. इसके बाद बीजों की ग्रेडिंग, सुखाने और फिर कड़ाही में भूनकर लावे यानी मखाने निकालने का प्रोसेस शुरू होता है. बाजार में मखाने के बीज और तैयार मखाने दोनों की कीमतें अच्छी मिलती है. एक बार निवेश करने के बाद यह फसल आपकी लागत के मुकाबले कई गुना ज्यादा रिटर्न देती है.
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