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Paddy Mandi Rates 2026: किस मंडी में है धान की सबसे ज्यादा डिमांड? जाते ही हाथों हाथ बिक जाता है माल


Paddy Mandi Rates 2026 : धान देश की सबसे जरूरी फसलों में से एक है और हर सीजन में किसान इस बात का इंतजार करते हैं कि उनकी उपज किस मंडी में सबसे अच्छे रेट पर बिकेगी. कई बार ऐसा देखा जाता है कि कुछ मंडियों में धान की मांग इतनी ज्यादा होती है कि किसानों का माल पहुंचते ही खरीद लिया जाता है. अच्छी क्वालिटी, निर्यात मांग और खरीदारों की संख्या किसी भी मंडी के रेट तय करने में जरूरी होती है. ऐसे में अगर आप भी धान बेचने की तैयारी कर रहे हैं, तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि धान की सबसे ज्यादा डिमांड देश की किस मंडी में है और कहां जाते ही हाथों हाथ माल बिक जाता है. 

धान की सबसे ज्यादा डिमांड देश की किस मंडी में है?

1. अलीगढ़ (अतरौली), उत्तर प्रदेश – धान की अलग-अलग किस्मों के आधार पर देश की कई मंडियां किसानों को अच्छे रेट दे रही हैं.  खासतौर पर बासमती धान की मांग वाले क्षेत्रों में रेट काफी मजबूत बने हुए हैं. बासमती धान के लिए अलीगढ़ की अतरौली मंडी सबसे चर्चित मंडियों में शामिल है. अगस्त 2025 के दौरान यहां बासमती का रेट लगभग 3,600 रुपये प्रति क्विंटल तक दर्ज किया गया.

2. बुलंदशहर (स्याना), उत्तर प्रदेश – बासमती किस्म के लिए स्याना मंडी प्रमुख केंद्र मानी जाती है. यहां इस किस्म का रेट करीब 3,200 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचा. बेहतर क्वालिटी और ज्यादा खरीदारों की मौजूदगी के कारण यहां कॉम्पिटिशन बना रहता है. 

3. सिरसा, हरियाणा – हरियाणा की सिरसा मंडी बासमती के लिए जानी जाती है. यहां इस किस्म का रेट लगभग 3,200 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया. निर्यात मांग और क्वालिटी की वजह से यहां धान की खरीद लगातार मजबूत बनी रहती है. 

4. उन्नाव (पुरवा), उत्तर प्रदेश – पुरवा मंडी में बासमती धान का रेट करीब 3,350 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचा. लंबे दाने वाले चावल की मांग के कारण यह मंडी किसानों और व्यापारियों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. 

5. बुलंदशहर (जहांगीराबाद), उत्तर प्रदेश – जहांगीराबाद मंडी में बासमती का रेट लगभग 3,100 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया. सुगंध और बेहतर क्वालिटी वाली फसल के लिए यहां खरीदारों की अच्छी संख्या रहती है. 

इन मंडियों में भी मिल रहे हैं धान के सबसे अच्छे रेट

सहारनपुर मंडी में बासमती का रेट करीब 2,960 रुपये प्रति क्विंटल रहा. इसके अलावा खैर मंडी में बासमती का रेट लगभग 2,850 रुपये प्रति क्विंटल तक दर्ज किया गया. यहां मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बना रहने से किसानों को स्थिर कीमतें मिलती हैं. वहीं मथुरा मंडी में बासमती का रेट करीब 2,860 रुपये प्रति क्विंटल रहा. प्रीमियम किस्मों के लिए यहां खरीदारों का  कॉम्पिटिशन  बना रहता है. अलीगढ़ मंडी में बासमती का रेट लगभग 2,860 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया. दनकौर मंडी में बासमती का रेट करीब 2,855 रुपये प्रति क्विंटल रहा. यहां मिलर्स और व्यापारियों की सक्रिय खरीद किसानों को अच्छे अवसर देती है. 

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मध्य भारत में कहां मिला सबसे ज्यादा रेट?

मध्य भारत में मध्य प्रदेश की बरेली मंडी ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है. यहां धान का अधिकतम रेट 4,550 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया, जबकि मंडी में लगभग 16.50 टन धान पहुंचा था. ऐसे में बेहतर क्वालिटी वाले धान को यहां मजबूत कीमत मिल रही है. 

सामान्य धान के लिए कौन सी मंडी रही सबसे आगे?

हाल ही में सामान्य धान के लिए रायसेन APMC मंडी, मध्य प्रदेश देश की प्रमुख मंडियों में सबसे आगे रही. यहां अधिकतम रेट 4,281 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया. मंडी का औसत रेट 2,347 रुपये प्रति क्विंटल रहा और इस फसल के लिए देशभर में 107 सक्रिय मंडियों में यह सबसे ऊंचे स्तर पर रही. 

दूसरी फसलों और अनाज के बाजार का क्या है हाल?

1. मक्का के रेट में पिछले कुछ समय से उतार-चढ़ाव बना हुआ है फिलहाल इसकी कीमत करीब 1,500 से 1,600 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास चल रही है. हालांकि पशु आहार और एथेनॉल उद्योग में बढ़ती मांग के चलते आगे रेट बढ़ने की उम्मीद है. 

2. सोयाबीन का बाजार काफी हद तक विदेशों की मांग और उत्पादन पर निर्भर है. 2025-26 में वैश्विक उत्पादन घटने और मांग बढ़ने का अनुमान है, जिससे सोयाबीन के रेट को सहारा मिल सकता है. हालांकि अभी घरेलू बाजार में दबाव बना हुआ है. 

3.धनिया के रेट में हाल के दिनों में थोड़ी गिरावट देखने को मिली है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार ने मजबूत आधार बना लिया है और आगे कीमतों में तेजी आ सकती है. 

4. जीरा के बाजार में अच्छी मजबूती देखने को मिल रही है. किसानों के स्टॉक रोककर रखने और निर्यात मांग बढ़ने से इसके रेट में तेजी बनी हुई है. 

5. चावल के बाजार पर अंतरराष्ट्रीय हालात का असर पड़ रहा है. खासकर मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण व्यापार प्ररेटित हुआ है, लेकिन भारत में उत्पादन अच्छा रहने से बाजार संतुलित बना हुआ है. वहीं बासमती चावल की मांग देश और विदेश दोनों बाजारों में मजबूत बनी हुई है. 

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