Friday, June 19, 2026
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अरहर की फसल से पाना है दोगुना उत्पादन? इन आसान बातों का बुवाई के समय रखें खास ध्यान


Pigeon Pea Farming Tips: भारत में खाने को लेकर अरहर की दाल का एक अलग ही मुकाम है. इसलिए मार्केट में इसकी डिमांड हमेशा बहुत हाई रहती है. लेकिन कई बार किसान पूरी मेहनत करने के बाद भी अरहर की उतनी पैदावार नहीं ले पाते जितनी उम्मीद होती है. कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि अरहर की खेती में सबसे बड़ा हाश बुवाई के सही समय और सही तरीकों का होता है. 

अगर आप भी इस खरीफ सीजन में अरहर से बंपर और सीधे दोगुनी पैदावार लेना चाहते हैं. तो 15 जुलाई से पहले इसकी बुवाई का काम हर हाल में पूरा कर लें. सही समय पर की गई शुरुआत फसल को मौसम की मार और कीटों के हमले से बचाती है. चलिए जानते हैं कि इस बार बुवाई के समय आपको किन खास बातों का ध्यान रखना है 

सही वैरायटी चुनना जरूरी

अरहर से अच्छी पैदावार लेने का के लिए अच्छे बीजों को चुनना सबसे जरूरी है. वैज्ञानिकों के मुताबिक आपको अपने क्षेत्र की जलवायु के हिसाब से उन्नत और हाइब्रिड किस्मों के बीजों का ही इस्तेमाल करना चाहिए. बुवाई से पहले बीज शोधन यानी सीड ट्रीटमेंट करना बिल्कुल न भूलें. बीजों को सड़ने और शुरुआती बीमारियों से बचाने के लिए बोने से पहले थिरम या कार्बेन्डाजिम जैसी दवाएं मिलाकर साफ कर लें. 

इसके बाद दाल वाली फसलों के लिए सबसे जरूरी राइजोबियम कल्चर से बीजों को मिक्स करें. यह तरीका पौधों की जड़ों में नाइट्रोजन फिक्स करने में मदद करता है. जिससे पौधे बहुत तेजी से ग्रो करते हैं और उनमें शाखाएं भी ज्यादा निकलती हैं.

यह भी पढ़ें: 11 रुपये का पौधा लगाकर हर साल लाखों कमा सकते हैं आप, इस किसान ने खुद लिखी अपनी किस्मत

बुवाई का सही तरीका 

अक्सर किसान भाई पारंपरिक छिटकवां विधि से अरहर बो देते हैं, जिससे पैदावार घट जाती है. वैज्ञानिक तरीका यह है कि अरहर की बुवाई हमेशा कतारों में और मेड़ बनाकर करनी चाहिए. लाइन से लाइन की दूरी और पौधे से पौधे का गैप सही बनाए रखें ताकि हर पौधे को पूरी धूप और हवा मिल सके. चूंकि अरहर की फसल को बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती.

खेत में नमी का इंतजाम होना चाहिए

इसलिए खेत में जलभराव रोकने का अच्छा इंतजाम होना चाहिए. मेड़ पर बुवाई करने से भारी बारिश के समय एक्स्ट्रा पानी नालियों से बाहर निकल जाता है और फसल सड़ने से बच जाती है. साथ ही, बुवाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें ताकि बीजों का अंकुरण एकदम परफेक्ट और एक समान हो.

यह भी पढ़ें: दुनिया का पहला किसान कौन था? उसने कौनसी फसल बोई थी, किस देश से था उसका ताल्लुक



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