Seoni Jumbo Custard Apple: आज के दौर में खेती-किसानी सिर्फ खेतों में धान-गेहूं या पारंपरिक फसलें उगाने तक ही सीमित नहीं रह गई है. अब बहुत से किसान अपने फार्म हाउस की खाली पड़ी जमीन का सही इस्तेमाल करके बागवानी से भी बहुत अच्छी कमाई कर रहे हैं. अगर आप भी अपने फार्म हाउस की खाली जमीन पर कोई ऐसा फलदार पेड़ लगाने की सोच रहे हैं जिसकी बाजार में भारी मांग हो और जो सबसे अलग दिखे.
तो मध्य प्रदेश के सिवनी का जम्बो सीताफल सबसे बढ़िया विकल्प है. आम तौर पर मिलने वाले सीताफलों के मुकाबले इसका साइज इतना बड़ा होता है कि इसके एक ही फल का वजन 500 ग्राम से लेकर पूरे 1 किलोग्राम तक बैठता है. अपनी खास खूबियों की वजह से सिवनी के इस सीताफल को अब जीआई टैग भी मिल चुका है. आप इसे अपने फार्म हाउस पर लगाकर आप बहुत ही कम मेहनत में हर साल बढ़िया मुनाफा ले सकते हैं.
ग्राफ्टेड पौधों का चुनाव
अपने फार्म हाउस पर इस जम्बो सीताफल की बागवानी शुरू करने के लिए सबसे जरूरी है कि आप किसी अच्छी नर्सरी से सिर्फ ग्राफ्टेड यानी कलमी पौधे ही खरीदें. बीज से तैयार किए गए पौधों में फल आने में बहुत लंबा वक्त लगता है और उनका आकार भी छोटा रह जाता है.
जबकि कलमी पौधे बहुत जल्दी फल देना शुरू कर देते हैं. इसे लगाने के लिए फार्म हाउस का ऐसा हिस्सा चुनें जहां दिनभर अच्छी और खुली धूप आती हो क्योंकि सीताफल के पेड़ों के बेहतर ग्रोथ के लिए धूप बहुत जरूरी है.
रोपाई का सही तरीका
पौधों की रोपाई से पहले करीब दो-दो फीट गहरे गड्ढे खोद लें और उनमें अच्छी मात्रा में गोबर की सड़ी हुई खाद मिला दें. पौधों को लगाते समय आपस में कम से कम 12 से 15 फीट की दूरी जरूर रखें जिससे आगे चलकर जब ये पेड़ बड़े हों तो इन्हें फैलने के लिए पूरी जगह मिल सके.
यह भी पढ़ें: ज्यादा बारिश से फसल खराब हो जाने पर प्रति बीघा कितना मुआवजा देती है सरकार?
कम पानी में बंपर पैदावार
इस जम्बो सीताफल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बहुत ज्यादा पानी या दिन-रात की भारी-भरकम देखभाल की जरूरत नहीं होती है. शुरुआत में पौधों को जमाने के लिए हल्के पानी की जरूरत होती है. लेकिन जब पौधे थोड़े बड़े और मजबूत हो जाते हैं. तो यह कम पानी और सूखी या पथरीली जमीन में भी बहुत आराम से पनप जाते हैं.
देखभाल का आसान तरीका
सिवनी क्षेत्र के आदिवासी परिवार भी इसे पूरी तरह प्राकृतिक और देसी तरीके से उगाते हैं. इसलिए आपको इसमें कोई महंगी रासायनिक खाद डालने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. साल में दो बार सिर्फ देसी खाद देने और समय पर पौधों की हल्की छंटाई करने से ही पूरा पेड़ फलों से लद जाता है. तीन से चार साल में जब यह बाग तैयार हो जाता है.
यह भी पढ़ें: बाढ़ या आग से पशुओं का नुकसान? टेंशन छोड़िए सरकार की यह धांसू स्कीम सीधे खाते में भेजेगी पैसा


