Farming Tips: हर साल बदलते मौसम और कमजोर पड़ते मानसून की वजह से किसानों की सबसे बड़ी चिंता सिंचाई को लेकर रहती है. कई इलाकों में बारिश समय पर नहीं होती तो कहीं पानी की कमी खेती पर सीधा असर डालती है. ऐसे में अगर ऐसी फसलें चुनी जाएं जिन्हें कम पानी की जरूरत होती है. तो सूखे जैसे हालात में भी अच्छी पैदावार ली जा सकती है.
इससे न सिर्फ सिंचाई का खर्च कम होता है बल्कि उत्पादन भी अच्छा रहता है. आज कई किसान पारंपरिक फसलों के साथ ऐसी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं जो कम संसाधनों में बेहतर रिटर्न देती हैं. सही तरीका और मिट्टी के मुताबिक फसल चुनी जाए तो पानी की बचत के साथ अच्छी कमाई भी की जा सकती है.
बाजरा, ज्वार और दालें बेहतर ऑप्शन
अगर आपके इलाके में पानी की कमी रहती है. तो बाजरा और ज्वार जैसी मोटे अनाज वाली फसलें बेहतरीन ऑप्शन साबित हो सकती हैं. इनकी जड़ें गहराई तक जाती हैं जिससे कम नमी में भी पौधे अच्छी तरह विकसित हो जाते हैं. इसके अलावा अरहर जैसी दाल वाली फसल भी कम पानी में बेहतर उत्पादन देने के लिए जानी जाती है.
इन फसलों की खास बात यह है कि यह गर्म और सूखे मौसम को भी सहन कर लेती हैं. यही वजह है कि जिन इलाकों में मानसून कमजोर रहता है. वहां किसान इनकी खेती को अपनाने लगे हैं. बाजार में भी मोटे अनाज और दालों की मांग लगातार बढ़ रही है जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है.
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तिल और मूंग से भी बढ़ेगा मुनाफा
कम पानी में अच्छी पैदावार देने वाली फसलों में तिल और मूंग भी शामिल हैं. इनकी खेती कम सिंचाई में आसानी से की जा सकती है और फसल तुलनात्मक तौर पर काफी कम समय में तैयार हो जाती है. अगर इनके साथ ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और मिट्टी में नमी बनाए रखने जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाए.
तो पानी की बचत और ज्यादा हो सकती है. विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि खेती शुरू करने से पहले मिट्टी की जांच कराई जाए और उसी के मुताबिक फसल का चुनाव किया जाए. इससे उर्वरकों का सही उपयोग होता है और उत्पादन बेहतर मिलता है.
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