Teak Cultivation Tips : ज्यादातर किसान अब ऐसी फसलों और पेड़ों की खेती करना चाहते हैं, जिनसे आने वाले समय में अच्छी कमाई हो सके. यही वजह है कि अब किसान पेड़ आधारित खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. इनमें सागवान (टीक) सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले पेड़ों में शामिल है. इसकी लकड़ी भारत ही नहीं विदेशों में भी काफी महंगी बिकती है और इसे सबसे कीमती इमारती लकड़ियों में गिना जाता है.
इसी बीच किसानों को सागवान की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ सरकार एक खास योजना चला रही है. इस योजना के तहत छोटे और सीमांत किसानों को सागवान के पौधे लगाने पर 100 प्रतिशत तक सरकारी सब्सिडी दी जा रही है.अगर आपके पास खाली जमीन है और आप लंबी अवधि का निवेश करना चाहते हैं, तो सागवान की खेती एक अच्छा ऑप्शन साबित हो सकती है. तो आइए जानते हैं कि इस योजना का फायदा कैसे उठा सकते हैं और सागवान की खेती कैसे की जाती है.
इस योजना का फायदा कैसे उठा सकते हैं?
अगर आप छत्तीसगढ़ के किसान हैं और अपनी निजी जमीन पर सागवान की खेती करना चाहते हैं, तो इस योजना का फायदा उठा सकते हैं. इसके लिए योजना की पात्रता और नियमों के अनुसार आवेदन करना होगा. छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों की जमीन के आधार पर सब्सिडी तय की है. अगर कोई छोटा या सीमांत किसान 5 एकड़ तक की जमीन पर सागवान के पौधे लगाता है, तो उसे पौधरोपण के लिए 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता दी जाएगी. इसके लिए प्रति पौधा 94.50 रुपये की सहायता तय की गई है. वहीं 5 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में सागवान का रोपण करने वाले बड़े किसानों और संस्थाओं को तय सहायता राशि का 50 प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी.
क्यों खास है सागवान की खेती?
सागवान की लकड़ी अपनी मजबूती, टिकाऊपन और दीमक-रोधी गुणों के कारण काफी महंगी मानी जाती है. इसका इस्तेमाल फर्नीचर, भवन निर्माण और इंटीरियर उद्योग में बड़े पैमाने पर किया जाता है. यही वजह है कि इसकी बाजार में हमेशा मांग बनी रहती है. इसके अलावा सागवान की छाल और पत्तियों का यूज कई प्रकार की दवाओं को बनाने में भी किया जाता है. लंबे समय में यह किसानों के लिए एक मजबूत संपत्ति साबित हो सकती है.
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सागवान की खेती कैसे करें?
सागवान की खेती के लिए किसी विशेष प्रकार की मिट्टी की जरूरत नहीं होती है. इसे दोमट मिट्टी में आसानी से उगाया जा सकता है. हालांकि खेत में पानी का जमाव नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे पौधों में रोग लगने का खतरा बढ़ जाता है. सागवान के पौधे सामान्य तापमान में अच्छी बढ़वार करते हैं. वहीं बहुत ज्यादा ठंड वाले क्षेत्रों में इसकी खेती सही नहीं मानी जाती है.अच्छी ग्रोथ के लिए मिट्टी का पीएच मान 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए. विशेषज्ञों के अनुसार सागवान की खेती में टिश्यू कल्चर तकनीक से तैयार पौधों का उपयोग करना बेहतर माना जाता है. ऐसे पौधे सामान्य पौधों की तुलना में तेजी से बढ़ते हैं. इनसे अच्छी क्वालिटी की लकड़ी मिलती है, इनका तना ज्यादा सीधा और गांठ रहित होता है, जिससे बाजार में बेहतर कीमत मिलती है. सागवान के पेड़ पूरी तरह तैयार होने में कई साल लगते हैं.
सागवान की खेती से कितनी हो सकती है कमाई?
सागवान की खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे खेत की मेड़ या खाली जमीन पर भी लगाया जा सकता है. पौधे पूरी तरह तैयार होने में लगभग 10 से 12 साल का समय लेते हैं. एक तैयार सागवान के पेड़ की कीमत करीब 25 हजार से 40 हजार रुपये तक मिल सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार एक एकड़ में लगभग 120 पौधे लगाए जा सकते हैं. जब ये पेड़ पूरी तरह तैयार हो जाते हैं, तब किसानों को करोड़ों रुपये तक की कमाई कर सकते हैं.
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