Tuesday, June 30, 2026
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Water Saving in Agriculture: अगर कमजोर पड़ा मानसून तो नुकसान से उबरने के इन तरीकों को अपनाएं किसान, होगा फायदा


Water Saving in Agriculture:  इस साल यानी 2026 में मानसून को लेकर मौसम विभाग यानी IMD ने पहले ही चिंता जताई है. IMD ने मई 2026 में अपना अनुमान बदलकर बताया कि इस बार बारिश सामान्य से कम यानी लॉन्ग पीरियड एवरेज का सिर्फ 90 प्रतिशत ही रह सकती है, और कमजोर मानसून आने का खतरा 60 प्रतिशत तक है. जून के शुरुआती दिनों में तो देश में बारिश सामान्य से करीब 40 प्रतिशत तक कम रही, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है. ऐसे हालात में किसानों के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि अगर मानसून कमजोर रहता है, तो वे किस तरह अपनी खेती को नुकसान से बचा सकते हैं. 

कम बारिश में इन फसलों की खेती करना रहेगा बेहतर

सबसे पहला और जरूरी तरीका है फसल चुनने में समझदारी दिखाना. अगर बारिश कम होने का अंदेशा हो, तो किसानों को ऐसी फसलें बोनी चाहिए जिन्हें ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती, जैसे बाजरा, ज्वार, मोटे अनाज, और मूंगफली.  धान जैसी ज्यादा पानी मांगने वाली फसलों की जगह कम पानी में तैयार होने वाली फसलें चुनना ज्यादा सुरक्षित विकल्प माना जाता है.  इससे पानी की कमी होने पर भी फसल पूरी तरह बर्बाद होने का खतरा कम हो जाता है. 

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पानी की बचत और मिट्टी की देखभाल से होगा फायदा

दूसरा तरीका है पानी बचाने और सही तरीके से इस्तेमाल करने पर ध्यान देना.  ड्रिप इरिगेशन यानी बूंद-बूंद सिंचाई और स्प्रिंकलर सिस्टम का इस्तेमाल करने से कम पानी में भी फसल को पूरा फायदा मिल जाता है. इसके अलावा जिन किसानों के पास तालाब या टैंक है, उन्हें बारिश का पानी इकट्ठा करके रखना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर उस पानी का इस्तेमाल किया जा सके. देश में करीब 60 प्रतिशत किसान सीधे मानसून की बारिश पर निर्भर रहते हैं और लगभग आधी खेती की जमीन में पक्की सिंचाई की सुविधा नहीं है, इसलिए पानी बचाना सबसे जरूरी कदम बन जाता है.  तीसरा तरीका है मिट्टी की सेहत का ध्यान रखना. जिन खेतों की मिट्टी में जैविक खाद यानी ऑर्गेनिक कंपोस्ट का इस्तेमाल होता है, वह मिट्टी पानी को ज्यादा देर तक सोखकर रखती है.  

कुल मिलाकर देखा जाए तो मानसून कमजोर रहने की स्थिति में घबराने की जगह सही प्लानिंग करना ही सबसे समझदारी वाला कदम है.  कम पानी में तैयार होने वाली फसलें चुनना, पानी का सही इस्तेमाल करना, मिट्टी की सेहत बनाए रखना और सरकारी योजनाओं का फायदा लेना, ये सभी तरीके मिलकर किसानों को मानसून की कमजोरी से होने वाले नुकसान से काफी हद तक बचा सकते हैं. 

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