
नर्सरी तैयार करने के लिए सबसे पहले टाइमिंग का सही होना बेहद जरूरी माना जाता है. बासमती की अलग-अलग किस्मों के हिसाब से मई के आखिरी हफ्ते से लेकर जून के मिड तक का समय पौध डालने के लिए सबसे बेस्ट रहता है. इस समय मौसम का तापमान बीजों के अच्छे अंकुरण के लिए एकदम परफेक्ट होता है.

नर्सरी तैयार करने के लिए सबसे पहले टाइमिंग का सही होना बेहद जरूरी माना जाता है. बासमती की अलग-अलग किस्मों के हिसाब से मई के आखिरी हफ्ते से लेकर जून के मिड तक का समय पौध डालने के लिए सबसे बेस्ट रहता है. इस समय मौसम का तापमान बीजों के अच्छे अंकुरण के लिए एकदम परफेक्ट होता है.

शानदार खुशबू और अच्छी पैदावार के लिए हमेशा भरोसेमंद सोर्स से लिया हुआ अच्छी क्वालिटी का बीज ही इस्तेमाल करना चाहिए. बीज को खेत में डालने से पहले उसे करीब चौबीस घंटे के लिए पानी में भिगोकर रखें और फिर उसे सूती कपड़े में बांधकर अंकुरित होने दें. बीज शोधन करने से पौधों में बीमारियों का खतरा काफी कम हो जाता है.

पौध तैयार करने के लिए जिस जमीन को चुन रहे हैं, उसकी मिट्टी एकदम उपजाऊ और समतल होनी चाहिए. खेत की दो-तीन बार अच्छी जुताई करके उसमें अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिला देना सबसे सही रहता है. मिट्टी को भुरभुरा बनाने के बाद ही उसमें नर्सरी के लिए छोटी-छोटी और उठी हुई क्यारियां बनानी चाहिए.

तैयार क्यारियों में अंकुरित हो चुके बीजों का छिड़काव एकदम बराबर तरीके से करना चाहिए जिससे पौधे एक जगह ज्यादा घने न उगें. बीजों को मिट्टी की एक पतली लेयर या हल्की खाद से ढक देना चाहिए जिससे उन्हें जरूरी गर्माहट मिल सके. इसके तुरंत बाद हल्का पानी देना चाहिए ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे.

नर्सरी में पानी का मैनेजमेंट बहुत सोच-समझकर करना पड़ता है क्योंकि ज्यादा पानी से बीज सड़ सकते हैं और कम पानी से सूख सकते हैं. सुबह या शाम के वक्त ही क्यारियों में हल्का पानी लगाना सबसे बेहतर रहता है. जब तक पौधे दो-तीन इंच के न हो जाएं, तब तक खेतों में हल्की नमी लगातार मेंटेन रखनी चाहिए.
Published at : 03 Jul 2026 02:46 PM (IST)


