
एक बड़ा संकेत पत्तों का रंग बदलना या उन पर अजीब से स्पॉट्स दिखना है. अगर आपको हरी-भरी फसल के पत्तों पर हल्के पीले, सफेद या भूरे रंग के धब्बे दिखाई देने लगें तो समझ जाएं कि रस चूसने वाले कीटों ने हमला शुरू कर दिया है. यह संकेत मिलते ही सतर्क हो जाना चाहिए.

इसके अलावा पौधों की ग्रोथ का अचानक रुक जाना या पत्तों का मुड़ना भी खतरे की घंटी है. कई बार कीट पत्तों के नीचे छिपकर उनका सारा न्यूट्रिशन सोख लेते हैं जिससे पत्ते ऊपर या नीचे की तरफ मुड़ने लगते हैं. अगर नई कलियां और पत्तियां कमजोर दिख रही हैं तो यह कीटों के पनपने का संकेत है.

खेत में अचानक तितलियों, पतंगों या भनभनाने वाले कीड़ों की तादाद का बढ़ जाना भी एक अहम इशारा है. ये उड़ने वाले कीड़े असल में अंडों से निकलने वाले खतरनाक लार्वा और कैटरपिलर के माता-पिता होते हैं. अगर ये खेत के आस-पास ज्यादा मंडरा रहे हैं तो समझें कि आने वाले दिनों में बड़ा हमला हो सकता है.

ध्यान देने वाली बात यह भी है कि पत्तों पर बारीक जाले या चिपचिपा पदार्थ दिखाई देने लगता है. स्पाइडर माइट्स जैसे छोटे कीट पत्तों के पीछे बहुत महीन जाले बना लेते हैं जो आसानी से नजर नहीं आते. वहीं कुछ कीट पत्तों पर एक लिक्विड छोड़ते हैं जिस पर बाद में काली फंगस जमने लगती है.

खेत में पक्षियों की एक्टिविटी अचानक बढ़ जाती है तो यह भी एक संकेत है. यानी पक्षी बार-बार आकर पौधों पर बैठ रहे हैं या जमीन को कुरेद रहे हैं तो वह वहां मौजूद सुंडियों और कीड़ों को खा रहे होते हैं. पक्षियों का यह मूवमेंट बताता है कि फसल में कीट आ चुके हैं.

इन सभी संकेतों को पहचानकर अगर आप शुरुआती स्टेज में ही जैविक कीटनाशकों का छिड़काव कर देते हैं तो बड़ा नुकसान टल जाता है. बीमारी आने के बाद इलाज करने से बेहतर है कि खतरे को भांपकर उसे पहले ही रोक दिया जाए.
Published at : 10 Jul 2026 01:19 PM (IST)


