Sawan Plant Tips: मानसून की दस्तक कई राज्यों में हो चुकी है. कई जगहों पर झमाझम बरसात देखने को मिल रही है. जुलाई महीने के आखिर से सावन भी शुरू हो जाएगा जहां इसका धार्मिक महत्व ज्यादा है. तो साथ ही इस महीने के मौसम के साथ उमस, बैक्टीरिया और पेट-सर्दी से जुड़ी मौसमी दिक्कतों का खतरा भी काफी ज्यादा बढ़ जाता है. अगर आप इस मानसून अपने परिवार को इन बीमारियों से बचाना चाहते हैं.
तो इसका सबसे आसान और नेचुरल नुस्खा आपकी बालकनी में ही छुपा है. इस मौसम में औषधीय पौधे लगाना बेहद फायदेमंद होता है क्योंकि बारिश के पानी से इनकी ग्रोथ बहुत तेजी से होती है और ज्यादा देखरेख की जरूरत भी नहीं पड़ती. यह पौधे न सिर्फ आपके घर के कोने-कोने को अपनी खुशबू से महकाएंगे बल्कि आपकी इम्यूनिटी को भी इतना बूस्ट कर देंगे. जान लें ऐसे ही 5 पौधों के बारे में.
सेहत से भरपूर ये 5 पौधे
- अश्वगंधा: मानसिक सुकून देने और स्ट्रेस-एंग्जायटी को कम करने के लिए यह पौधा सबसे बेस्ट माना जाता है. इसके बीजों को जुलाई के शुरुआती दिनों में बोया जाता है और इसकी सेहतमंद जड़ें पूरी तरह विकसित होने में करीब 150 से 180 दिन का वक्त लेती हैं. तनाव दूर करने के साथ-साथ यह शरीर की कमजोरी को मिटाकर अंदरूनी ताकत और इम्यूनिटी को भी बूस्ट करता है.
- लेमनग्रास :- इस पौधे को सावन के सीजन में लगाना बहुत आसान है. इसे आप नर्सरी से लाकर या किसी पुराने पौधे की जड़ को अलग करके लगा सकते हैं. लगभग 50 से 60 दिनों में यह हरी-भरी झाड़ी की तरह अच्छी तरह फैल जाता है. इसकी पत्तियों से नींबू जैसी ताज़ा खुशबू आती है. जो बालकनी के आस-पास से मच्छरों को दूर भगाती है. इसकी पत्तियों की चाय मानसून में होने वाले इन्फेक्शन, सर्दी-खांसी और सिरदर्द में तुरंत राहत देती है.
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- अजवाइन:- अगर आप इसकी पत्तियों को छुएंगे तो एक कमाल की खुशबू आएगी. मानसून के सीजन में इसकी कटिंग लगाने पर यह मात्र 20-25 दिनों में आपके गमले को भर देता है. पेट फूलने और गैस की शिकायत में इसकी पत्तियां तुरंत राहत पहुंचाती हैं.
- पुदीना:-चटनी और रायते का स्वाद बढ़ाने वाला पुदीना पेट दर्द और अपच का परमानेंट इलाज है. सावन के दिनों में इसकी एक छोटी सी डंडी भी मिट्टी में लगा देंगे, तो यह 30-35 दिनों के भीतर पहली कटाई के लिए बिल्कुल तैयार हो जाता है.
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- तुलसी:-हमारी बालकनी का सबसे जरूरी और पवित्र पौधा जो हर घर की जरूरत है. इसे आप 10 से 12 इंच के छोटे गमले में लगा सकते हैं. इसकी पत्तियां सर्दी-जुकाम के काढ़े और चाय के लिए परफेक्ट हैं, जो पौधे लगाने के 40-50 दिन बाद इस्तेमाल की जा सकती हैं.
ऐसे तैयार करें गमला
अपने इन औषधीय पौधों को लंबे समय तक स्वस्थ रखने के लिए आपको 12 से 14 इंच के गमलों का इस्तेमाल करना चाहिए. गमले के निचले हिस्से में पानी निकलने के लिए एक ड्रेनेज होल जरूर बनाएं और उस पर दीये का टुकड़ा रख दें जिससे मिट्टी बाहर न बहे. अब सबसे जरूरी स्टेप है मिट्टी तैयार करना. इसके लिए 50% आम मिट्टी में 30% वर्मी कम्पोस्ट या पुरानी गोबर की खाद मिलाएं और साथ में 20% रेत जरूर मिक्स कर लें.
रेत मिलाने से फायदा यह होगा कि बारिश का एक्स्ट्रा पानी गमले में ठहरेगा नहीं और पौधों की जड़ें गलने से बच जाएंगी. ध्यान रखें कि पुदीना और अजवाइन को हमेशा फैलाव वाले चौड़े गमलों में लगाएं. जबकि अश्वगंधा के लिए गहरा गमला चुनें क्योंकि इसकी जड़ें नीचे तक जाती हैं. इन सभी को ऐसी जगह रखें जहां सुबह की कम से कम 4-5 घंटे की अच्छी धूप मिले और पानी तभी दें जब ऊपरी मिट्टी सूखी नजर आए.
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