
केंद्र सरकार की कैबिनेट ने कपास उत्पादकता मिशन को मंजूरी दी है. यह योजना साल 2026-27 से लेकर 2030-31 तक चलेगी. इस मिशन के लिए सरकार ने कुल 5,659 करोड़ रुपये का बजट रखा है. इस योजना का मकसद है कि किसान आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों से कपास की खेती करें, ताकि इससे उनकी पैदावार बढ़े और उनकी कमाई भी अच्छी हो. साथ ही सरकार का लक्ष्य है कि साल 2031 तक कपास की पैदावार को 440 किलो प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 755 किलो प्रति हेक्टेयर तक पहुंचाया जाए.

इस योजना के तहत खास बात यह है कि जो किसान क्लोजर स्पेसिंग तकनीक अपनाकर कपास की बुवाई करेंगे, उन्हें 14,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की मदद मिलेगी. इस तकनीक में पौधों को 90 सेंटीमीटर और 30 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाया जाता है. इस तरह कम जगह में ज्यादा पौधे लगाए जा सकते हैं, जिससे उपज भी बढ़ जाती है.

अगर कोई किसान क्लोजर स्पेसिंग तकनीक की जगह “इंटीग्रेटेड क्रॉप मैनेजमेंट” यानी आईसीएम तरीका अपनाना चाहता है, तो उसे भी सरकार की तरफ से मदद मिलेगी. इस तरीके में पौधों को 90 सेंटीमीटर और 60 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाया जाता है. इस विधि को अपनाने वाले किसानों को 7,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की मदद दी जाएगी. यानी किसान अपनी सुविधा के हिसाब से इन दोनों में से कोई भी तरीका चुन सकते हैं.

इस योजना में एक जरूरी शर्त भी रखी गई है. वे है कि एक किसान साल भर में ज्यादा से ज्यादा 2 हेक्टेयर जमीन के लिए ही यह सहायता ले सकता है. यानी अगर किसी किसान के पास इससे ज्यादा जमीन है, तो भी उसे सिर्फ 2 हेक्टेयर तक का ही फायदा मिलेगा.

अगर योजना से मिलने वाले फायदे के बारे में बात करें तो, इस योजना से किसानों को कई तरह के फायदे मिलेंगे. सबसे पहले तो खेती की लागत कम हो जाएगी, क्योंकि सरकार सीधे पैसे देकर मदद करेगी. दूसरा फायदा यह होगा कि आधुनिक तकनीक अपनाने से पैदावार भी बढ़ेगी, जिससे किसान की कमाई में इजाफा होगा. इसके अलावा इस मिशन के तहत किसानों को अच्छी किस्म के बीज, नई खेती तकनीक और बाजार तक पहुंचने की सुविधा भी दी जाएगी, जिससे उन्हें फसल बेचने में भी आसानी होगी.

इस जानकारी के बाद हर किसान के दिमाग में यही सवाल आता है कि आखिर इसके लिए कैसे और कहां से करें. ऐसे में आपको बता दें कि इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को अपने राज्य के कृषि विभाग की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होगा. आवेदन करते समय किसानों को अपनी जमीन के कागजात, आधार कार्ड और बैंक खाते की जानकारी देनी होगी. साथ ही किसानों को अपनी फसल का सत्यापन भी कराना होगा, जिसके लिए एग्रीस्टैक पोर्टल और डिजिटल क्रॉप सर्वे का इस्तेमाल किया जाएगा.
Published at : 14 Jul 2026 03:30 AM (IST)


