Thursday, July 16, 2026
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मानसून कमजोर पड़े तो क्या बोएं किसान? ये फसलें दे सकती हैं अच्छा मुनाफा


कम बारिश के दौर में मक्का आपके लिए सबसे बेस्ट और घाटे का सौदा नहीं होने वाला ऑप्शन साबित हो सकता है. इसे बहुत ज्यादा पानी की जरूरत बिल्कुल नहीं होती. बस खेत में हल्की नमी बनी रहे तो भी इसकी ग्रोथ शानदार रहती है. आज के समय में मार्केट में मक्के की डिमांड भी काफी तगड़ी बनी हुई है.

कम बारिश के दौर में मक्का आपके लिए सबसे बेस्ट और घाटे का सौदा नहीं होने वाला ऑप्शन साबित हो सकता है. इसे बहुत ज्यादा पानी की जरूरत बिल्कुल नहीं होती. बस खेत में हल्की नमी बनी रहे तो भी इसकी ग्रोथ शानदार रहती है. आज के समय में मार्केट में मक्के की डिमांड भी काफी तगड़ी बनी हुई है.

अगर आप थोड़ा और स्मार्ट कदम उठाना चाहते हैं, तो मूंग और उड़द जैसी दलहनी फसलों का रुख कर सकते हैं. ये फसलें सिर्फ 60 से 65 दिनों के भीतर पककर पूरी तरह तैयार हो जाती हैं. खास बात यह है कि कम पानी लेने के साथ-साथ ये खेत की मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को भी बहुत बढ़ा देती हैं.

अगर आप थोड़ा और स्मार्ट कदम उठाना चाहते हैं, तो मूंग और उड़द जैसी दलहनी फसलों का रुख कर सकते हैं. ये फसलें सिर्फ 60 से 65 दिनों के भीतर पककर पूरी तरह तैयार हो जाती हैं. खास बात यह है कि कम पानी लेने के साथ-साथ ये खेत की मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को भी बहुत बढ़ा देती हैं.

तिलहन फसलों की बात करें तो सोयाबीन और तिल इस सूखे जैसे मौसम में आपके सच्चे दोस्त साबित हो सकते हैं. मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों के किसान अब मानसून कमजोर होने पर इन्हीं फसलों पर सबसे ज्यादा दांव लगा रहे हैं. कम सिंचाई में भी इनसे मिलने वाला ऑयल प्रोडक्शन और मुनाफा दोनों ही बेहद लाजवाब रहते हैं.

तिलहन फसलों की बात करें तो सोयाबीन और तिल इस सूखे जैसे मौसम में आपके सच्चे दोस्त साबित हो सकते हैं. मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों के किसान अब मानसून कमजोर होने पर इन्हीं फसलों पर सबसे ज्यादा दांव लगा रहे हैं. कम सिंचाई में भी इनसे मिलने वाला ऑयल प्रोडक्शन और मुनाफा दोनों ही बेहद लाजवाब रहते हैं.

मोटे अनाजों यानी मिलेट्स की खेती आजकल सबसे ज्यादा ट्रेंड में चल रही है. कमजोर मानसून में बाजरा, ज्वार और रागी जैसी फसलें किसी वरदान से कम नहीं हैं. इन्हें न तो बहुत ज्यादा खाद-पानी चाहिए और न ही इनकी देखरेख में भारी-भरकम खर्च आता है. इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह हर मौसम को आसानी से झेल जाती हैं.

मोटे अनाजों यानी मिलेट्स की खेती आजकल सबसे ज्यादा ट्रेंड में चल रही है. कमजोर मानसून में बाजरा, ज्वार और रागी जैसी फसलें किसी वरदान से कम नहीं हैं. इन्हें न तो बहुत ज्यादा खाद-पानी चाहिए और न ही इनकी देखरेख में भारी-भरकम खर्च आता है. इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह हर मौसम को आसानी से झेल जाती हैं.

अगर आपके खेत की मिट्टी थोड़ी रेतीली या कम उपजाऊ भी है. तो आप बेझिझक ग्वार की बुवाई कर सकते हैं. ग्वार की फसल सूखे को बहुत ही मजबूती से बर्दाश्त कर लेती है. मार्केट में इसके ग्वार गम की भारी डिमांड होने की वजह से किसानों को इसके बहुत ही शानदार और बंपर दाम मिल जाते हैं.

अगर आपके खेत की मिट्टी थोड़ी रेतीली या कम उपजाऊ भी है. तो आप बेझिझक ग्वार की बुवाई कर सकते हैं. ग्वार की फसल सूखे को बहुत ही मजबूती से बर्दाश्त कर लेती है. मार्केट में इसके ग्वार गम की भारी डिमांड होने की वजह से किसानों को इसके बहुत ही शानदार और बंपर दाम मिल जाते हैं.

मानसून कमजोर होने का मतलब यह कतई नहीं है कि आपकी पूरी कमाई डूब जाएगी. जरूरत बस इस बात की है कि आप समय रहते पारंपरिक खेती से हटकर इन कम पानी वाली फसलों को अपनाएं. जिससे आप कम पानी में भी खेती से अच्छा मुनाफा कूट सकते हैं.

मानसून कमजोर होने का मतलब यह कतई नहीं है कि आपकी पूरी कमाई डूब जाएगी. जरूरत बस इस बात की है कि आप समय रहते पारंपरिक खेती से हटकर इन कम पानी वाली फसलों को अपनाएं. जिससे आप कम पानी में भी खेती से अच्छा मुनाफा कूट सकते हैं.

Published at : 16 Jul 2026 01:20 PM (IST)

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