
खेत तैयार करते समय जल निकासी यानी पानी निकलने का रास्ता बढ़िया होना चाहिए. टमाटर के पौधों में अगर पानी रुका तो जड़ें गलने लगेंगी. इसके लिए खेतों की गहरी जुताई करें और गोबर की सड़ चुकी अच्छी खाद या कंपोस्ट मिट्टी में मिला दें. इससे जमीन को ताकत मिलती है.

पौधे तैयार करने के लिए हमेशा बेड या उठी हुई क्यारियों का इस्तेमाल करें. जब नर्सरी में पौधे 20 से 25 दिन के हो जाएं तब उन्हें मुख्य खेत में लगाएं. रोपाई हमेशा शाम के वक्त करें जिससे तेज धूप से छोटे पौधे मुरझाएं नहीं और मिट्टी को आसानी से पकड़ लें.

मानसून में खरपतवार यानी अनचाही घास बहुत तेजी से बढ़ती है. यह घास आपकी फसल के हिस्से का पोषण चुरा लेती है. इसलिए रोपाई के 20 दिन के भीतर पहली निराई-गुड़ाई जरूर कर दें. समय पर सफाई रखने से पौधों को धूप और हवा अच्छी मिलती है.

टमाटर के पौधों को सहारा देना यानी स्टैकिंग करना बहुत जरूरी काम है. बांस और तार के सहारे पौधों को बांधकर ऊपर चढ़ाएं. इससे फल जमीन पर नहीं गिरते जिससे वह सड़ने से बच जाते हैं और उनकी क्वालिटी एकदम फ्रेश बनी रहती है. मार्केट में ऐसी क्वालिटी के दाम अच्छे मिलते हैं.

इस मौसम में कीड़े और फंगस का अटैक सबसे ज्यादा होता है. इससे बचने के लिए नीम के तेल का छिड़काव करें या जरूरत पड़ने पर सही फंगीसाइड का इस्तेमाल करें. बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखते ही असरदार कदम उठाएं जिससे पूरी फसल में संक्रमण न फैले.

जब टमाटर पूरी तरह पककर लाल हो जाएं तभी उनकी तुड़ाई करें. लेकिन अगर आपको उन्हें दूर की मंडियों में भेजना है, तो हल्का लाल या पीलापन आने पर ही तोड़ लें. सही समय पर की गई तुड़ाई और अच्छी पैकिंग आपको बाजार में सबसे ज्यादा मुनाफा दिलाएगी.
Published at : 18 Jul 2026 05:11 PM (IST)


