Friday, July 24, 2026
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CBSE 10वीं में 54 फीसदी अंक और गणित में 41, फिर JEE में AIR 349, आज IIT बॉम्बे से कर रहे BTech CSE, Career Hindi News


कुछ साल पहले सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा में जैनेंद्रजीत के केवल 54 फीसदी अंक आए थे। लेकिन साल 2023 में इसी छात्र ने जेईई मेन में 99.98 पर्सेंटाइल और जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 349 (ओपन कैटेगरी) हासिल की।

IIT Bombay BTech CSE student success story : हर साल सीबीएसई बोर्ड रिजल्ट में कम अंक आने के चलते लाखों छात्र मायूस हो जाते हैं। निराशा में डूबकर उनका आत्मविश्वास खत्म हो जाता है। उन्हें ऐसा लगता है कि करियर बर्बाद हो गया। लेकिन जैनेंद्रजीत की कहानी ऐसे छात्रों की सोच को पूरी तरह बदल देगी। उन्होंने ठोकर खाकर वापसी की शानदार मिसाल पेश की है। आज जैनेंद्रजीत देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में से एक IIT बॉम्बे में बीटेक कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर रहे हैं। आईआईटी बॉम्बे के बीटेक कंप्यूटर साइंस कोर्स की सीट जेईई एडवांस्ड के टॉपरों को मिलती है। लेकिन आपको यह जानकारी हैरानी होगी कि कुछ साल पहले सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा में जैनेंद्रजीत के केवल 54 फीसदी अंक आए थे। गणित में उन्हें 100 में सिर्फ 41 अंक और विज्ञान में 48 अंक मिले थे। उनके कई दोस्त 90 प्रतिशत से अधिक अंक लाए थे। खराब रिजल्ट के चलते उन्हें काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। कुछ पल के लिए तो उन्हें अपनी काबिलियत पर भी शक होने लगा था।

शानदार कमबैक

लेकिन साल 2023 में इसी छात्र ने जेईई मेन में 99.98 पर्सेंटाइल और जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 349 (ओपन कैटेगरी) और ओबीसी रैंक 54 हासिल कर सभी को चौंका दिया। जैनेंद्रजीत ने अपने कारनामे से सबको बता दिया कि कोई एक परीक्षा कभी भी किसी छात्र का भविष्य तय नहीं करती।

मुझे लगा कि यह नतीजा मेरा नहीं है

अपनी कहानी बताते हुए एक यूट्यूब वीडियो में जैनेंद्रजीत कहते हैं कि वह अपनी 10वीं कक्षा के नतीजों का बेसब्री से इंतजार नहीं कर रहे थे। परीक्षा से पहले उन्होंने लगभग 40 से 50 दिन बिस्तर पर आराम करते हुए बिताए थे, कई क्लास नहीं ले पाए थे और उन्हें पता था कि उनकी तैयारी पर असर पड़ा है। जब वह जूम (Zoom) पर एक दोस्त के साथ पढ़ाई कर रहे थे, तो किसी ने उन्हें मैसेज भेजा कि नतीजे घोषित हो गए हैं।

“मैंने वेबसाइट खोली, अपना स्कोर देखा और सन्न रह गया। मेरे मन में पहला ख्याल यही आया कि यह मेरा नतीजा नहीं हो सकता। मैंने पेज रिफ्रेश किया, अपना रोल नंबर दोबारा चेक किया, लेकिन यह सच था। मेरे 54% अंक आए थे।” आंखों में आंसू नहीं थे। कोई गुस्सा नहीं था। बस एक ही सवाल उनके मन में चल रहा था। “मेरे इतने कम अंक कैसे आए?”

उन्होंने बताया कि सबसे मुश्किल हिस्सा अंक नहीं थे जब दोस्तों ने अपने स्कोर शेयर करना शुरू किया, तो सच्चाई को स्वीकार करना और भी मुश्किल हो गया। कुछ के 80% अंक आए थे।

दूसरों के 90% से ज़्यादा अंक थे। कुछ ने तो 98% तक अंक हासिल किए थे। वह याद करते हैं, “मेरे पूरे दोस्तों के ग्रुप में मेरे ही सबसे कम अंक थे।” हालांकि, मार्क्स से ज्यादा उसे इस बात की चिंता थी कि लोग क्या कहेंगे। “मुझे बहुत डर लग रहा था कि मेरे माता-पिता क्या कहेंगे।” वह कहते हैं कि उस रात वे लगभग चुप ही रहे। लेकिन निराशा के बीच कहीं से एक और आवाज आई।

“तुम ऐसे नहीं हो। तुम इससे बेहतर हो।” इस सोच ने सब कुछ बदल दिया।

फैसला जिसने उनकी जिंदगी बदल दी

हार मानने के बजाय जैनेंद्रजीत ने खुद को नए सिरे से तैयार करने का फैसला किया। समाज के लिए नहीं। आलोचकों का मुंह बंद करने के लिए नहीं। बल्कि खुद के लिए। ‘अगर मुझे ज़िंदगी में कुछ सार्थक हासिल करना है, तो बहाने काम नहीं आएंगे।’ उन्होंने हर दिन की योजना बनाना शुरू किया। उन्होंने पढ़ाई के घंटे तय किए, ध्यान भटकाने वाली चीजें कम कीं, सोशल मीडिया का इस्तेमाल सीमित किया, YouTube का इस्तेमाल सिर्फ सीखने के लिए किया और धीरे-धीरे दिन में लगभग 10 घंटे पढ़ाई को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया।

हालांकि यह बदलाव आसान नहीं था। ऐसे दिन भी आए जब उन्हें खुद पर शक हुआ वह खुलकर मानते हैं कि शुरुआत में गणित बहुत मुश्किल लगता था। फिजिक्स से उन्हें डर लगता था। केमिस्ट्री की रिएक्शन याद नहीं रहती थीं। कुछ दिन तो सुबह से रात तक पढ़ने के बाद भी उन्हें लगता था कि उन्होंने कुछ हासिल नहीं किया। कई पल ऐसे आए जब मुझे सच में लगा कि JEE मेरे बस की बात नहीं है। जब भी निराशा हावी होती, वह अपने दोस्तों का सहारा लेते। इस सफर में एक बात हमेशा उनके साथ रही। आपके सबसे अच्छे टीचर अक्सर आपके दोस्त ही होते हैं।

गणित में 41 मार्क्स से JEE एडवांस्ड में AIR 349 ​​तक

शायद जैनेंद्रजीत के सफर का सबसे खास हिस्सा गणित में आया उनका बदलाव है। 10वीं बोर्ड में जहां उन्हें गणित में सिर्फ 41 अंक मिले थे, वहीं आगे चलकर उन्होंने देश की सबसे कठिन प्रवेश परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन किया।

सफलता के पीछे थीं ये 3 आदतें

जैनेंद्रजीत अपनी सफलता का श्रेय तीन महत्वपूर्ण आदतों को देते हैं—

– क्लास से पहले तैयारी: हर टॉपिक को कक्षा में पढ़ाए जाने से पहले यूट्यूब पर समझ लेते थे, जिससे लेक्चर आसानी से समझ आते थे।

– रोजाना लक्ष्य तय करना: केवल प्रेरणा पर निर्भर रहने के बजाय हर दिन के स्पष्ट अध्ययन लक्ष्य बनाते थे।

– हर चैप्टर के बाद PYQs हल करना: अध्याय पूरा होते ही पिछले वर्षों के प्रश्न (Previous Year Questions) हल करते थे, जिससे समझ आता था कि JEE में सवाल किस तरह पूछे जाते हैं।

उनका मानना है कि महंगे कोचिंग मटेरियल से ज्यादा इन आदतों ने उनकी सफलता में योगदान दिया।

डिस्क्लेमर: यह लेख जैनेंद्रजीत द्वारा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध यूट्यूब वीडियो में शेयर किए गए अनुभवों और सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध जानकारी पर आधारित है।



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