Red Ladyfinger Cultivation Tips: भिंडी लगभग हर घर में पसंद की जाने वाली सब्जी है, इसीलिए बाज़ार में साल भर इसकी ज़बरदस्त डिमांड बनी रहती है. लेकिन अब हरी भिंडी के साथ-साथ लाल भिंडी ने भी मार्केट में तहलका मचाना शुरू कर दिया है. रंग में अनोखी होने के साथ-साथ यह सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है. जिस वजह से बड़े शहरों, मॉल और सुपरमार्केट्स में लोग इसे महंगे दामों पर भी हाथों-हाथ खरीद रहे हैं.
सामान्य हरी भिंडी के मुकाबले इसकी खेती में लागत लगभग बराबर ही आती है, लेकिन मंडी में इसका रेट कई गुना ज्यादा मिलता है. कम जमीन में भी तगड़ा प्रॉफिट कमाने वाले स्मार्ट किसानों के लिए यह फसल एकदम परफेक्ट ऑप्शन बनती जा रही है.
बीमारियों से मुकाबला
लाल भिंडी की सबसे बड़ी खासियत इसका गहरा लाल-बैंगनी रंग है, जो इसमें मौजूद एंथोसायनिन नाम के तत्व की वजह से होता है. यह तत्व हमारे शरीर के लिए एक पावरफुल एंटी-ऑक्सीडेंट का काम करता है, जो हार्ट पेशेंट्स और डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है.
न्यूट्रिशन से भरपूर
इसके अलावा इसमें भरपूर मात्रा में आयरन, कैल्शियम और फाइबर भी पाया जाता है. खेती के नजरिए से देखें तो हरी भिंडी के मुकाबले लाल भिंडी के पौधों में कीड़े और फंगल बीमारियां बहुत कम लगती हैं. इसका सीधा मतलब यह है कि इसमें केमिकल और कीटनाशकों का खर्च न के बराबर आता है, जिससे फसल पूरी तरह नेचुरल तैयार होती है.
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हरी भिंडी से तीन गुना रेट
कमाई के मामले में लाल भिंडी का कोई मुकाबला नहीं है. जहां आम हरी भिंडी बाजार में 20 से 40 रुपये किलो बिकती है, वहीं लाल भिंडी की कीमत मंडी और सुपरमार्केट्स में 100 से 500 रुपये प्रति किलो तक आराम से पहुँच जाती है. इसकी काशी लालिमा जैसी उन्नत वैराइटीज बुवाई के महज 45 से 50 दिनों के अंदर ही फल देना शुरू कर देती हैं.
होती है बंपर कमाई
अगर सही तरीके से देखभाल की जाए तो एक एकड़ खेत से करीब 40 से 50 क्विंटल तक की बंपर पैदावार आसानी से मिल जाती है. कम पानी, कम लागत और सामान्य देखभाल में तैयार होने वाली यह लाल भिंडी आज के टाइम में कम समय में जेब भारी करने का सबसे पक्का जरिया है.
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