यूपी सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए शीर्ष अदालत से कहा है कि 2020 में भर्ती हुए 67867 शिक्षकों की नौकरी नहीं जाएगी। अगर इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक नई मेरिट लिस्ट में कुछ नए कैंडिडेट पात्र पाए जाते हैं, तो उन्हें खाली पड़े पदों पर नियुक्ति दी जाएगी।
यूपी की योगी सरकार ने 69000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर दिया है। यूपी सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए शीर्ष अदालत से कहा है कि 2020 में भर्ती हुए 67867 शिक्षकों की नौकरी नहीं जाएगी। अगर इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक नई मेरिट लिस्ट में कुछ नए कैंडिडेट पात्र पाए जाते हैं, तो उन्हें खाली पड़े पदों पर नियुक्ति दी जाएगी। जस्टिस दीपांकर दत्ता और शील नागू की पीठ के समक्ष दाखिल हलफनामे में सरकार ने कहा यह कवायद सिर्फ 69 हजार शिक्षकों की नियुक्ति मामले तक सीमित रहेगी। भविष्य में होने वाले किसी भर्ती में इसका कोई लाभ नहीं दिया जाएगा। सरकार ने शीर्ष अदालत में 8,270 ऐसे अभ्यर्थियों की संशोधित सूची भी पेश की है जो अभी सेवा में नहीं हैं।
भर्ती प्रक्रिया की विवरण
राज्य सरकार ने कहा कि 19 मई को आदेश के बाद, राज्य के सक्षम अधिकारियों ने हाईकोर्ट के 13 अगस्त 2024 के फैसले के अनुसार मेधा सूची को दोबारा तैयार करने सहित कई विस्तृत प्रक्रियाएं पूरी कीं। हलफनामे में कहा गया कि मौजूदा कार्यवाही में 20 जुलाई को एक हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें संशोधित मेधा सूची में जगह पाने वाले अन्य लोगों को शामिल करने के लिए प्रक्रिया पूरी की है, बिना पहले से नियुक्त लोगों को हटाए। हलफनामा में कहा गया कि यह इस शर्त पर है कि मौजूदा रिक्तियां हों, उम्मीदवार न्यूनतम योग्यता पूरी करते हों और इस प्रक्रिया को भविष्य के मामलों में मिसाल के तौर पर न माना जाए। सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि अदालत का जो भी आदेश होगा, उसका पालन किया जाएगा। अब इस मामले में मंगलवार को सुनवाई होगी।
क्या है पूरा मामला
– यूपी सरकार ने 1 दिसंबर 2018 को 69 हजार शिक्षक भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया।
– 6 जनवरी 2019 में परीक्षा आयोजित की गई।
– इसके अगले दिन कटऑफ तय की गई, जिसमें सामान्य वर्ग के लिए 65 फीसदी और आरक्षित वर्ग के लिए 60 फीसदी रखा गया।
– मामला हाईकोर्ट पहुंचा और फिर 18 नवंबर 2020 को सुप्रीम कोर्ट, जहां शीर्ष अदालत ने सरकार के इस कट-ऑफ फैसले को सही ठहराया।
– जून 2020 में सरकार ने 67 हजार 867 अभ्यर्थियों की पहली चयन सूची जारी कर उन्हें स्कूलों में नियुक्त कर दिया गया (ST वर्ग के 1133 पद योग्य उम्मीदवार न मिलने से खाली रह गए थे)।
क्यों हुआ विवाद
विवाद दो अहम वजहें थीं। आरक्षित वर्ग (SC/ST/OBC) के वे मेधावी उम्मीदवार जिन्होंने सामान्य कटऑफ से अधिक अंक पाकर अनारक्षित श्रेणी में जगह बनाई, आरोप था कि उन्हें अनारक्षित सीटों पर सही स्थान नहीं मिला।
दूसरी तरफ दलील दी गई कि जिन आरक्षित अभ्यर्थियों ने TET या ATRE परीक्षा में 5% अंक छूट का लाभ लिया है, उन्हें जनरल कैटेगरी में माइग्रेट नहीं किया जाना चाहिए। इसी दौरान 5 जनवरी 2022 को 6800 अतिरिक्त अभ्यर्थियों की एक सूची जारी की गई थी, जिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी।
– 13 मार्च 2023 को सिंगल बेंच ने कहा कि 60 फीसदी से 65 फीसदी के बीच अंक पाने वाले आरक्षित उम्मीदवारों को जनरल माइग्रेशन का लाभ नहीं मिलेगा।
– 13 अगस्त 2024 को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच का फैसला रद्द कर दिया। डिवीजन बेंच ने कहा- 69 हजार पदों के लिए नई मेरिट लिस्ट तैयार की जाए। जो रिजर्व कैटेगरी के उम्मीदवार जनरल मेरिट में आते हैं, उन्हें जनरल कैटेगरी में ही गिना जाए। इसके बाद क्षैतिज आरक्षण लागू किया जाए। क्षैतिज आरक्षण स्पेशल कैटेगरी जैसे- महिला, दिव्यांग, पूर्व सैनिक, ट्रांसजेंडर को हर जाति के भीतर मौका देने की व्यवस्था है।
सुप्रीम कोर्ट ने रोक दी थी नई मेरिट लिस्ट
हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ कई कैंडिडेट सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। 9 सितंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने नई मेरिट लिस्ट बनाने की प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी।
सरकार ने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हाईकोर्ट के 13 अगस्त 2024 के फैसले के मुताबिक संशोधित मेरिट लिस्ट तैयार कर ली गई है।


