PM RKVY Scheme: कृषि क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन का ईनाम देते हुए केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र को बड़ी सौगात दी है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना यानी प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत महाराष्ट्र के लिए 335 करोड़ रुपये की मदर सैंक्शन जारी की है. खास बात यह है कि इस योजना की दूसरी किस्त पाने वाला महाराष्ट्र देश का पहला राज्य बन गया है, जो राज्य के कृषि प्रशासन की कार्यकुशलता को भी दर्शाता है.
बेहतरीन फंड यूटिलाइजेशन के चलते मिली यह मंजूरी
यह मंजूरी यूं ही नहीं मिली, बल्कि महाराष्ट्र द्वारा योजना के तहत मिले फंड का समय पर और प्रभावी इस्तेमाल करने के बाद दी गई है. केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ हुई ऑनलाइन समीक्षा बैठक में यह जानकारी सामने आई कि महाराष्ट्र ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत मिली राशि का 75 फीसदी से ज्यादा हिस्सा तय समयसीमा के भीतर खर्च कर दिया, जबकि कई घटकों में तो यह आंकड़ा 80 फीसदी से भी ऊपर रहा. यही वजह है कि चौहान ने महाराष्ट्र के इस प्रदर्शन की खुले तौर पर सराहना की.
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राज्य सरकार ने भी दिया अपना हिस्सा
इस मंजूर फंड के साथ–साथ राज्य सरकार का 40 फीसदी कॉम्प्लीमेंट्री हिस्सा यानी करीब 223 करोड़ रुपये भी कृषि विकास के लिए राज्य को उपलब्ध कराया गया है. इस बैठक में कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे समेत केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए.
क्या है PM-RKVY योजना, कैसे करती है काम?
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना साल 2005 में शुरू की गई थी और इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में कृष्णोन्नति योजना के साथ नए सिरे से मंजूरी दी है. इस योजना की खास बात यह है कि इसमें कैफेटेरिया अप्रोच अपनाई गई है, यानी राज्यों को अपनी जरूरत के हिसाब से अलग–अलग घटकों में से चुनने की आजादी दी जाती है. इतना ही नहीं, राज्य सरकारों को यह लचीलापन भी दिया गया है कि वे अपनी विशिष्ट जरूरतों के आधार पर एक घटक से दूसरे घटक में फंड को दोबारा आवंटित कर सकें, जिससे स्थानीय जरूरतों के हिसाब से बेहतर योजना बनाई जा सके.
इन क्षेत्रों में खर्च होगी यह राशि
कृषि मंत्री भरणे के मुताबिक, इस फंड को माइक्रो इरिगेशन यानी सूक्ष्म सिंचाई, कृषि यंत्रीकरण, जैविक खेती, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और नेशनल एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट स्कीम के तहत अलग–अलग परियोजनाओं में लगाया जाएगा.
किन किसानों को मिलेगा सीधा फायदा
इस फंड का सबसे बड़ा फायदा उन किसानों को मिलेगा, जो सिंचाई की कमी, पुरानी खेती तकनीक या मिट्टी की घटती उर्वरता जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं. माइक्रो इरिगेशन और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन जैसी परियोजनाओं से खासतौर पर छोटी जोत वाले किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, जबकि कृषि यंत्रीकरण से खेती की लागत घटाने और उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी. साथ ही जैविक खेती से जुड़ी परियोजनाएं उन किसानों के लिए फायदेमंद रहेंगी, जो रासायनिक खेती छोड़कर टिकाऊ खेती अपनाना चाहते हैं.
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