Organic Farming Subsidy: केमिकल खादों और फर्टिलाइजर्स के इस्तेमाल से सिर्फ सेहत ही खराब नहीं होती है. बल्कि खेतों की उपजाऊ शक्ति भी कम होती दी है. इसी वजह से अब ऑर्गेनिक यानी जैविक खेती की मांग बाजार में तेजी से बढ़ रही है. लोग सेहत को लेकर जागरूक हो रहे हैं और बिना केमिकल वाले अनाज, फल और सब्जियों के लिए खुशी-खुशी अच्छे दाम देने को तैयार हैं.
लेकिन किसानों के मन में अक्सर यह डर रहता है कि शुरुआत में जैविक खेती करने से लागत ज्यादा आएगी और पैदावार कम हो सकती है. किसानों की इसी चिंता को दूर करने और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए सरकार एक शानदार योजना लेकर आई है. अब हरियाणआ सरकार ऑर्गेनिक खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 10000 रुपये तक की आर्थिक मदद दे रही है. चलिए आपको बताते हैं इस योजना के बारे में पूरी जानकारी.
प्रति एकड़ 10 हजार रुपये की सब्सिडी
अब देश में बहुत से किसाब केमिकल वाली खेती छोड़कर पूरी तरह ऑर्गेनिक खेती कर रहे हैं. अब इसमें हरियाणा सरकार अपने राज्य के किसानों को आर्थिक मदद भी दे रही है. योजना के तहत किसानों को प्रति एकड़ 10000 रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जा रही है. यह पैसा किसानों को सीधे उनके बैंक खाते में डीबीटी के जरिए भेजा जाता है.
यह रकम किसानों को जैविक खाद, केंचुआ खाद वर्मीकंपोस्ट, जैविक बीज और बायो-पेस्टिसाइड्स खरीदने में मदद करती है. इससे किसानों पर शुरुआती लागत का भारी बोझ नहीं पड़ता और वह बेफिक्र होकर रासायनिक मुक्त खेती की ओर कदम बढ़ा सकते हैं.

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एपीडा सर्टिफिकेशन जरूरी
सब्सिडी योजना का पूरा लाभ उठाने के लिए किसानों को अपनी फसलों का जैविक प्रमाणन यानी सर्टिफिकेशन कराना जरूरी होगा. इसके लिए किसानों को एपीडा (APEDA) से आधिकारिक प्रमाणपत्र हासिल करना होता है. इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि फसल में किसी भी तरह के रासायनिक खाद या कीटनाशक का इस्तेमाल नहीं हुआ है और खेती पूरी तरह से ऑर्गेनिक है.
सरकार का मानना है कि जब आपके पास प्रमाणित जैविक उत्पाद का टैग होगा तो बाजार में आपकी फसल की साख और भरोसा काफी बढ़ जाएगा. इससे किसानों को अपनी उपज न सिर्फ स्थानीय और घरेलू मंडियों में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मनचाहे और ऊंचे दामों में बेचने का शानदार मौका मिलेगा.

इन कामों के लिए भी मदद
जैविक खेती की सफलता पूरी तरह से मिट्टी की क्वालिटी और प्राकृतिक खाद पर टिकी होती है. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार किसानों को अपने ही खेत पर वर्मीकंपोस्ट पिट या बायो-डाइजेस्टर बनाने के लिए अलग से वित्तीय सहायता दे रही है.
बाजार से महंगी खाद खरीदने के बजाय अगर किसान अपने खेत पर ही गोबर और कचरे से उच्च गुणवत्ता वाली खाद तैयार करते हैं तो उनकी खेती का खर्च हमेशा के लिए कम हो जाता है. जैविक खाद के इस्तेमाल से मिट्टी में मित्र कीटों की संख्या बढ़ती है, नमी रोकने की क्षमता में सुधार होता है और लंबे समय में फसल की पैदावार दोगुनी हो जाती है.
ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स की तगड़ी डिमांड
आजकल बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक ऑर्गेनिक यानी केमिकल-फ्री खाने-पीने की चीजों की डिमांड बहुत तेजी से बढ़ रही है. लोग अपनी हेल्थ को लेकर काफी अवेयर हो चुके हैं और केमिकल अनाज, फल और सब्जियों के लिए नॉर्मल मार्केट रेट से 20 से 30 परसेंट ज्यादा पैसे देने को भी तैयार हैं. जब आप ऑर्गेनिक फार्मिंग शुरू करते हैं. तो स्टार्टिंग में थोड़ा पेशेंस रखना पड़ता है.
लेकिन एक बार जब सॉइल क्वालिटी बेहतर हो जाती है और प्रॉपर फसल तैयार होने लगती है, तो आपको अपनी उपज बेचने के लिए मंडियों के चक्कर नहीं काटने पड़ते. बायर्स खुद आपके फार्म पर आकर अच्छे रेट्स में माल उठा लेते हैं. इससे आपकी इयरली इनकम तो बढ़ती ही है. इसके साथ ही मार्केट में आपका अपना एक ब्रांड भी सेट हो जाता है.
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