अमेरिका के मैसाचुसेट्स राज्य के कैम्ब्रिज में रहने वाले 12 वर्षीय मिडिल स्कूल छात्र अहमद अब्देलसलाम ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जो चलने-फिरने या शरीर की हरकत से पैदा होने वाली ऊर्जा को बिजली में बदल सकती है।
जहां 12 साल की उम्र के ज्यादातर बच्चे पढ़ाई, अपना होमवर्क पूरा करने, मोबाइल रील्स देखने या फिर खेल कूद में बिजी रहते हैं, वहीं इसी उम्र के अहम अब्देलसलाम ने कमाल का काम किया है। अमेरिका के मैसाचुसेट्स राज्य के कैम्ब्रिज में रहने वाले 12 वर्षीय मिडिल स्कूल छात्र अहमद अब्देलसलाम ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जो चलने-फिरने या शरीर की हरकत से पैदा होने वाली ऊर्जा को बिजली में बदल सकती है। उनके इस तकनीक का नाम VERDA है। इस अनोखे आविष्कार की बदौलत अहमद ने 2026 3M यंग साइंटिस्ट चैलेंज के टॉप 10 फाइनलिस्ट में जगह बनाई है। बता दें कि इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता के विजेता को 25,000 डॉलर (करीब 21 लाख रुपये) का पुरस्कार दिया जाएगा।
बिजली पैदा करने की दिशा में नया समाधान
जहां ज्यादातर लोग चलने को केवल रोजमर्रा की एक सामान्य गतिविधि मानते हैं, वहीं अहमद ने इसे क्लीन एनर्जी का एक नया और अनछुआ स्रोत के रूप में देखा। इसी सोच ने उन्हें ऐसी तकनीक विकसित करने के लिए प्रेरित किया, जो लोगों की हरकत से बनने वाली ऊर्जा का उपयोग कर बिजली पैदा करने की दिशा में एक नया समाधान पेश करती है।
इंडिया टूडे की एक रिपोर्ट में अहमद के हवाले से बताया कि उन्होंने इस प्रतियोगिता में इसलिए हिस्सा लिया क्योंकि उन्हें विज्ञान की मदद से वास्तविक जीवन की समस्याओं का समाधान ढूंढना पसंद है। उनका उद्देश्य यह साबित करना था कि कम उम्र के छात्र भी ऐसे नवाचार कर सकते हैं, जो लोगों के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी लाभदायक हों। उनके अनुसार, यह प्रतियोगिता सिर्फ जीतने का मंच नहीं है, बल्कि नई चीजें सीखने, एक युवा वैज्ञानिक के रूप में खुद को विकसित करने और यह साबित करने का अवसर भी है कि एक छात्र भी ऐसा आविष्कार कर सकता है, जो समाज और पर्यावरण के लिए सकारात्मक बदलाव ला सके।
VERDA कैसे काम करता है?
VERDA की तकनीक एनर्जी हार्वेस्टिंग के सिद्धांत पर आधारित है। इसमें चलने-फिरने, शरीर की हरकत या अन्य गतियों से उत्पन्न होने वाली गतिज ऊर्जा को एकत्र कर उसे विद्युत ऊर्जा में बदल दिया जाता है। आमतौर पर यह ऊर्जा बिना किसी उपयोग के नष्ट हो जाती है, लेकिन VERDA इस ऊर्जा को व्यर्थ जाने से रोकता है। यह सिस्टम पहले उस ऊर्जा को संग्रहित (स्टोर) करता है और फिर उसे कम बिजली से चलने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को संचालित करने के लिए उपयोग में लाता है। इस तरह यह तकनीक रोजमर्रा की गतिविधियों से पैदा होने वाली ऊर्जा का बेहतर उपयोग कर स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा उपलब्ध कराने की दिशा में एक नया समाधान प्रस्तुत करती है।
नोबेल विजेता वैज्ञानिक से मिली प्रेरणा
अहमद बताते हैं कि उनके सबसे बड़े प्रेरणास्रोत मिस्र-अमेरिकी नोबेल पुरस्कार विजेता रसायन वैज्ञानिक अहमद जेवेल हैं। जेवेल ने फेम्टोकेमिस्ट्री के क्षेत्र में ऐसा काम किया, जिससे वैज्ञानिक बेहद कम समय में होने वाली रासायनिक प्रक्रियाओं का अध्ययन कर सके। अहमद का मानना है कि इस खोज ने विज्ञान के क्षेत्र में नई संभावनाओं के दरवाजे खोले।
अब मिलेगा वैज्ञानिक का मार्गदर्शन
2026 3M यंग साइंटिस्ट चैलेंज के टॉप-10 फाइनलिस्ट में शामिल होने के बाद अहमद को 3M के एक वैज्ञानिक का मार्गदर्शन मिलेगा। उनकी मदद से वह अपने आविष्कार को और बेहतर बनाएंगे और फिर राष्ट्रीय स्तर की फाइनल प्रतियोगिता में इसे प्रस्तुत करेंगे। इस प्रतियोगिता के विजेता को 25,000 डॉलर (करीब 21 लाख रुपये) का पुरस्कार मिलेगा।


