Wednesday, August 5, 2026
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IAS Smit Panchal : पापा बहुत हुई काली मजदूरी… लोहार का बेटा बना IAS, भट्ठी से UPSC 30वीं रैंक तक का सफर, Career Hindi News


स्मित गुजरात के एक बेहद सिंपल परिवार से आते हैं। उन्होंने पैसों की तंगी झेली। लोगों के ताने सुने। कई मुश्किलों के बाद यूपीएससी परीक्षा में AIR रैंक 30 के साथ सफलता हासिल की।

IAS Smit Panchal : 22 अप्रैल 2024 को जब यूपीएससी का फाइनल रिजल्ट आया तब स्मित पंचाल अपनी छोटी सी लोहार की दुकान पर लोहे को आकार दे रहे थे। तपती भट्ठी की गर्मी और हथौड़े की आवाज के बीच उन्होंने फोन पर अचानक यूपीएससी सिविल सेवा रिजल्ट का मैसेज देखा। लिस्ट देखते ही वह खुशी से रो पड़े। भागकर अपने पिता को गले लगाकर कहा- “पापा बहुत हो गई अब काली मजदूरी, अब आप रिटायरमेंट ले सकते हो।” वे घर आए और उन्होंने अपनी मां से भी कहा कि इतने सालों तक जो वह चुप रहीं, अब उन्हें चुप रहने की जरूरत नहीं है, वे बोल सकती हैं क्योंकि उनका बेटा अब आईएएस बन चुका है। स्मित को यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2024 में ऑल इंडिया रैंक 30 (AIR 30) हासिल हुई थी। गुजरात के अहमदाबाद के रहने वाले स्मित की सफलता की कहानी इस बात का बड़ा सबूत है कि आपका परिवार चाहे किसी भी पेशे से ताल्लुक रखता हो, दृढ़ इच्छाशक्ति से कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। संघर्ष, धैर्य, कड़ी मेहनत के दम पर अपने ख्वाब पूरे किए जा सकते हैं, इसमें पारिवारिक पृष्ठभूमि आडे़ नहीं आती।

पैसे की तंगी में बीता बचपन

स्मिथ का परिवार असल में मूल रूप से गुजरात के अरावली जिले का रहने वाला है। रोजगार की तलाश में वे अहमदाबाद आकर बस गए। वे विश्वकर्मा समुदाय से संबंध रखते हैं, जहां उनके परिवार में कारपेंट्री, फर्नीचर या वेल्डिंग, लोहार का काम किया जाता है। उनके पिता हसमुखभाई पांचाल, लोहार का काम करते थे और मां गृहणी (हाउसवाइफ) हैं। माता-पिता दोनों केवल 10वीं तक पढ़े थे, लेकिन उनकी हमेशा यही इच्छा थी कि उनका बेटा खूब पढ़ाई करे। स्मित ने अपने पिता को हमेशा कड़ी मेहनत करते देखा, जिनके हाथों में अक्सर छाले और चोट के निशान होते थे। पिता के इन संघर्षों को देखकर स्मित ने बचपन में ही ठान लिया था कि उन्हें पिता को इस काम से बाहर निकालना है और जल्द से जल्द रिटायरमेंट देना है।

यूपीएससी का सपना और कॉलेज की पढ़ाई

स्मित ने 10वीं कक्षा के बाद 2017 में ही यूपीएससी (UPSC) करने का फैसला ले लिया था। इसके पीछे दो मुख्य कारण थे: पहला, अपने पिता को एक बेहतर जिंदगी देना और दूसरा, सिविक सेंटर जाने पर कलेक्टर/डीएम के काम और उनकी जिले को सुधारने की शक्ति से प्रभावित होना। उन्होंने 11वीं और 12वीं में आर्ट्स स्ट्रीम चुनी। चूंकि उनके आस-पास या रिश्तेदारों में कोई आईएएस नहीं था, इसलिए उन्हें मार्गदर्शन (गाइडेंस) और संसाधनों की भारी कमी का सामना करना पड़ा। उन्होंने राजनीति विज्ञान (पॉलिटिकल साइंस) में बीए (BA) किया और कॉलेज में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल भी हासिल किया।

2022 में यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली चले गए

कॉलेज के बाद स्मित दिल्ली जाकर तैयारी करना चाहते थे, लेकिन जब उन्होंने वहां रहने और पढ़ाई के खर्च का हिसाब लगाया, तो वह उनके बजट से बहुत बाहर था। ऐसे में उनके कजिन (चाचा के लड़के) ने उनकी मदद की और उनकी पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने की जिम्मेदारी ली।

दिल्ली आकर स्मित ने एक संस्थान से कोचिंग से पढ़ाई शुरू की। लेकिन पहले प्रयास में घबराहट के कारण सीसेट (CSAT) के पेपर में उनसे काफी गलतियां हो गईं और केवल ढाई नंबरों की कमी की वजह से उनका प्रीलिम्स नहीं निकला। हार मानने के बजाय, उन्होंने अपनी गलतियों को एनालाइज किया और अपने कमजोर एरिया को सुधारने पर फोकस किया।

अहमदाबाद वापसी और रिसेप्शनिस्ट की नौकरी

अब स्मित के पास दोबारा अपने भाई से पैसे मांगने की हिम्मत नहीं थी, इसलिए वे बिना बताए दिल्ली छोड़कर वापस अहमदाबाद आ गए। मेंस की तैयारी के लिए 50,000 रुपये की रकम जुटाने के उद्देश्य से उन्होंने अहमदाबाद के एक लोकल कोचिंग इंस्टीट्यूट में रिसेप्शनिस्ट और काउंसलर के रूप में नौकरी शुरू की। यहां काम करने के दौरान लोगों ने उन्हें ताने भी दिए कि “अगर तुम 6 प्रयास भी दोगे, तो इंटरव्यू तक नहीं पहुंच पाओगे”। स्मित इन तानों को अनसुना कर नौकरी के साथ-साथ रोजाना 4-5 घंटे पढ़ते रहे।

जरूरत के मुताबिक पैसे इकट्ठा होने पर उन्होंने नौकरी छोड़ दी और रोजाना 10 से 14 घंटे प्रीलिम्स के लिए पढ़ाई की। उन्होंने विशेष रूप से दोपहर 2 से 5 बजे के बीच सीसेट की खूब प्रैक्टिस की। चुनाव के कारण प्रीलिम्स परीक्षा 15-20 दिन आगे बढ़ गई, जिससे उनकी तैयारी और मजबूत हो गई और उनका प्रीलिम्स क्लियर हो गया।

मेंस के दौरान कड़ा संघर्ष

मेंस की तैयारी के लिए स्मित दोबारा दिल्ली गए, लेकिन इस बार वे किराए पर कमरा नहीं लेना चाहते थे। सौभाग्य से उनके भाई का ट्रांसफर दिल्ली हो गया था, तो स्मित उनके 10/8 के छोटे से कमरे में रहने लगे। वे केवल रात को 12 से सुबह 6 बजे तक सोने के लिए कमरे पर आते थे और पूरा दिन लाइब्रेरी में बिताते थे। इसी दौरान, ओल्ड राजेंद्र नगर की एक लाइब्रेरी में पानी भरने के कारण तीन छात्रों की दुखद मृत्यु हो गई, जिसके बाद सभी अंडरग्राउंड लाइब्रेरीज बंद हो गईं। इसके बाद स्मित ने लैंडलॉर्ड को बिना बताए उसी छोटे से कमरे में रहकर पढ़ाई की। दोस्तों के संदेह जताने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी, शॉर्ट नोट्स बनाए, जमकर आंसर राइटिंग की और मेंस की परीक्षा दी।

वेटिंग पीरियड और दोबारा वेल्डिंग का काम

मेंस की परीक्षा के बाद का वेटिंग पीरियड उनके लिए बेहद कठिन था। उन्होंने स्टेट पीसीएस (GPSS) और हेड क्लर्क जैसी क्लास-थ्री परीक्षाओं की तैयारी भी शुरू कर दी थी। इस दौरान वे घर वापस आ गए और अपने पिता के साथ लोहार का काम करने लगे। 9 दिसंबर को मेंस का रिजल्ट आया और उनका चयन हो गया।

इंटरव्यू

स्मित को इंटरव्यू की तैयारी के लिए केवल 20 से 25 दिन का समय मिला क्योंकि उनका इंटरव्यू पहले ही फेज में (15 जनवरी को) निर्धारित था। लेकिन उन्होंने इसमें शानदार प्रदर्शन किया। फाइनल रिजल्ट में उन्होंने कुल 1,008 मार्क्स हासिल किए, जिसमें रिटन एग्जाम में 804 मार्क्स और पर्सनैलिटी टेस्ट (इंटरव्यू) में 204 मार्क्स शामिल हैं। उनके ऑप्शनल सब्जेक्ट, पॉलिटिकल साइंस और इंटरनेशनल रिलेशंस (PSIR) में उन्हें 275 मार्क्स मिले, जिससे उन्हें 30 AIRs हासिल करने में मदद मिली।



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