Success Story: गाजियाबाद की राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की शिक्षिका डॉ. रेनू त्रिपाठी को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए चुना गया है। 5 सितंबर को राष्ट्रपति उन्हें सम्मानित करेंगी।
Success Story: एक सच्चा शिक्षक वही होता है जो केवल किताबों में लिखे अक्षरों को न पढ़ाए, बल्कि बच्चों के मन में सीखने की एक ऐसी इच्छा जगाए जो पूरे जीवन उनके साथ रहे। कुछ ऐसा ही अद्भुत काम कर दिखाया है उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले की टीचर डॉ. रेणु त्रिपाठी ने। उनकी इसी लगन, कड़ी मेहनत और शिक्षा के क्षेत्र में दिए गए योगदान का सम्मान करते हुए भारत सरकार ने उन्हें इस वर्ष के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित करने का फैसला किया है।
5 सितंबर को नई दिल्ली में शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले विशेष समारोह के दौरान देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें इस राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित करेंगी। इस उपलब्धि से गाजियाबाद जिले ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के शिक्षा जगत में खुशी की लहर दौड़ गई है। पिछले लगभग 20 वर्षों से वे राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में अपनी सेवाएं दे रही हैं। इससे पहले वर्ष 2022 में उन्हें उत्तर प्रदेश के ‘राज्य शिक्षक पुरस्कार’ से भी नवाजा जा चुका है।
क्लासरूम को बनाया मजेदार और एक्टिविटी-बेस्ड
गाजियाबाद के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में कार्यरत साइंस टीचर रेणु त्रिपाठी ने पढ़ाई के तरीकों को बदलकर बच्चों के लिए शिक्षा को बेहद आसान और मनोरंजक बनाया। उन्होंने महसूस किया कि बच्चे अक्सर रटने से ऊब जाते हैं, इसलिए उन्होंने खेल-खेल में सीखने के तरीके को अपने पढ़ाने में इस्तेमाल किया।
उनकी इस पहल से स्कूल में बच्चों की उपस्थिति में जबरदस्त इजाफा हुआ। जो बच्चे पहले स्कूल आने से कतराते थे, वे अब नए-नए प्रयोगों की मदद से रुचि लेकर पढ़ाई करने लगे हैं।
तकनीक और डिजिटल माध्यमों का शानदार उपयोग
रेणु त्रिपाठी ने अपने सरकारी स्कूल में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भी काफी काम किया। उन्होंने कंप्यूटर, ऑडियो-विजुअल एड्स और एजुकेशनल ऐप्स के माध्यम से कठिन से कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाया।
डिजिटल युग को अपनाते हुए डॉ. रेनू त्रिपाठी ने विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए यूट्यूब चैनल बनाए, ऑनलाइन प्रेजेंटेशन और व्हाट्सएप ग्रुप्स का सहारा लिया। कोविड काल से लेकर आज तक वे डिजिटल माध्यमों से छात्राओं का मार्गदर्शन कर रही हैं। उन्होंने 12 पुस्तकें और कई रिसर्च पेपर भी लिखे हैं।
छात्र-छात्राओं और शिक्षकों के लिए बड़ी मिसाल
इस साल देश भर से कुल 48 श्रेष्ठ शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुना गया है। डॉ. रेनू त्रिपाठी की यह शानदार उपलब्धि साबित करती है कि अगर मन में सच्ची निष्ठा हो, तो सरकारी स्कूल की छात्राएं भी राष्ट्रीय स्तर पर अपना और अपने देश का नाम रोशन कर सकती हैं। रेणु त्रिपाठी की यह शानदार सफलता साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो सीमित संसाधनों के बावजूद भी सुधार और बदलाव लाया जा सकता है।


