साइना का परिवार उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखता है, लेकिन अब वो सब पिछले कई सालों से मुंबई में रहे हैं। साइना ने श्री कलगीधर मिशन हाई स्कूल से स्कूली पढ़ाई पूरी की।
हाल ही में इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (ICSI) की CS प्रोफेशनल जून 2026 परीक्षा का रिजल्ट जारी हुआ था, जिसमें खुशी अग्रवाल के साथ-साथ साइना समीर खान ने ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल कर सफलता का परचम लहराया है। साइना की बात करें, तो उन्होंने 700 में से 432 अंक प्राप्त किए। हालांकि उनके लिए यह सफर आसान नहीं था। वो एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता दर्जी हैं और मां हाउसवाइफ। उनकी उम्र महज 19 साल है। ऐसे में यह उपलब्धि उनके लिए और भी खास हो जाती है। चलिए आज हम आपको साइना समीर खान की सफलता का मंत्र बताते हैं।
कौन हैं साइना
साइना का परिवार उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखता है, लेकिन अब वो सब पिछले कई सालों से मुंबई में रहे हैं। साइना ने श्री कलगीधर मिशन हाई स्कूल से स्कूली पढ़ाई पूरी की। मिडिल क्लास फैमिली से आने वाली साइना के पिता दर्जी हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। वह चार बहनों में दूसरे नंबर पर हैं। 19 साल की साइना फिलहाल श्री चिनाई कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स से BCom (Hons) की पढ़ाई कर रही हैं।
12वीं के बाद तय नहीं था CS करने का फैसला
साइना को कक्षा 12वीं के बाद भी ये नहीं पता था कि उन्हें कौन-सा प्रोफेशनल कोर्स करना चाहिए। CS करने का फैसला भी उन्होंने पहले से नहीं सोच रखा था। साइना के मुताबिक, उनकी एक बहन ने उन्हें CS कोर्स के बारे में जानकारी हासिल करने की सलाह दी थी। इसके बाद उन्होंने कुछ दिनों तक इस कोर्स के बारे में रिसर्च की। जानकारी लेने के बाद उन्होंने CS एंट्रेंस एग्जाम देने का फैसला किया और तैयारी शुरू कर दी।
कितने घंटे करती थीं पढ़ाई
सीएस प्रोफेशनल की परीक्षा का सिलेबस काफी बड़ा होता है। साइना ने पढ़ाई के लिए रोजाना घंटे तय करने के बजाय टारगेट पर फोकस किया। टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने हर दिन दो या तीन चैप्टर पूरा करने का लक्ष्य रखा। इसे पूरा करने में चाहें कितने भी घंटे क्यों ना ही लग जाए। हालांकि, औसतन वह रोज करीब 10 से 12 घंटे पढ़ाई करती थीं।
लगातार परीक्षा देने से बिगड़ी तबीयत
साइना ने अप्रैल और मई के दौरान परीक्षा की तैयारी तेज कर दी थी। इसके बाद लगातार परीक्षाओं का दौर शुरू हुआ। CS Professional परीक्षा के दोनों ग्रुप देने वाले छात्रों को पेपर के बीच ज्यादा लंबा ब्रेक नहीं मिलता है। साइना के मुताबिक, एक परीक्षा देकर लौटने के तुरंत बाद उन्हें अगली परीक्षा की तैयारी शुरू करनी पड़ती थी। शुरुआती कुछ परीक्षाएं उन्होंने ठीक से दीं, लेकिन लगातार चल रहे परीक्षा शेड्यूल का उनकी सेहत पर असर पड़ा। वह बीमार हो गईं और उन्हें ठीक होने के लिए ग्लूकोज चढ़ाया गया। लगातार हॉस्पिटल के चक्कर भी काटने पड़ें। लेकिन इसके बावजूद भी उन्होंने हार नहीं मानी और खुद को संभाला। बाकी परीक्षाएं पूरी कीं। आखिरकार, उन्हें ऑल इंडिया रैंक 1 मिली।
आगे क्या है साइना का प्लान
BCom की पढ़ाई पूरी करने के बाद साइना LLB भी करना चाहती हैं। हालांकि, उनका लक्ष्य कंपनी सेक्रेटरी के रूप में काम करना जारी रखना है। वह अपनी कानूनी पढ़ाई का इस्तेमाल कॉरपोरेट और रेगुलेटरी मामलों में अपनी प्रोफेशनल क्षमता मजबूत करने के लिए करना चाहती हैं।


