Thursday, February 26, 2026
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बेहद करामाती हैं ये जंगली पौधे, औषधीय गुणों से भरपूर, कई बीमारियों के लिए रामबाण!


आदित्य कृष्ण/अमेठी: हर एक पेड़-पौधे में कोई ना कोई औषधीय गुण जरूर होता है. ये बात अलग है कि कई पेड़-पौधे ऐसे हैं, जिनके औषधीय गुणों की जानकारी किसी को नहीं है. वर्तमान समय में कुछ ऐसी औषधि है, जो जंगलों के बीच पाई जाती है, लेकिन लोग जानकारी के अभाव में उन औषधि का इस्तेमाल सही ढंग से नहीं कर पाते हैं. आज ऐसी ही औषधि के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं जो कई बीमारियों में रामबाण साबित होगी.

वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर मनोज तिवारी ने बताया कि प्रत्यक्षऔर अप्रत्यक्ष रूप से हर औषधि के अपने अलग-अलग फायदे हैं. कोई औषधि हृदय रोग के लिए फायदेमंद है तो कई औषधि खांसी-जुखाम बुखार के साथ पेट और कैंसर रोगों के लिए फायदेमंद और रामबाण उपचार है. सभी को इस्तेमाल करने के अलग-अलग तरीके हैं और परामर्श लेकर औषधि का सेवन करने से शरीर पूरी तरीके से स्वस्थ एवं निरोगी होता है.

बीमारियों से बचाएंगी ये जड़ी-बूटियां

बात अगर औषधीय की करें तो हरण, बहेड़ा, अश्वगंधा, शिलाजीत, तुलसी, अजवाइन, लटजीरा, अरंडी, भृंगराज जैसी औषधियां कई बीमारियों के लिए फायदेमंद होती हैं. अश्वगंधा औषधि शक्ति वर्धक है. इसके साथ ही तुलसी यूनिटी पावर बढ़ाने के लिए रामबाण औषधि है. इसके अलावा हरण, बहेड़ा और आवलां औषधि कब्ज हटाने के साथ हृदय रोगियों के लिए फायदेमंद  है. इसके अलावा शिलाजीत शक्ति वर्धक बुद्धि वर्धक होने के साथ कई अन्य बीमारियों के लिए फायदेमंद है. इसके साथ ही भृगंराज औषधि का इस्तेमाल बालों के उपचार में होता  है. बता दें कि इनमें अलग-अलग बीमारियों को ठीक करने के बड़े गुण होते हैं.

इन औषधियों के हैं बड़े फायदे

अर्जुन:अर्जुन का पेड़ आमतौर पर जंगलों में पाया जाता है और यह धारियों-युक्त फलों की वजह से आसानी से पहचान में आता है. इसके फल कच्चेपन में हरे और पकने पर भूरे लाल रंग के होते हैं. अर्जुन का वानस्पतिक नाम टर्मिनेलिया अर्जुना है. औषधीय महत्व से इसकी छाल और फल का ज्यादा उपयोग होता है. अर्जुन की छाल में अनेक प्रकार के रासायनिक तत्व पाये जाते हैं. जिनमें से प्रमुख कैल्शियम कार्बोनेट, सोडियम व मैग्नीशियम प्रमुख है. अर्जुन की छाल का चूर्ण तीन से छह ग्राम गुड़, शहद या दूध के साथ दिन में दो या तीन बार लेने से दिल के मरीजों को काफी फ़ायदा होता है. वैसे अर्जुन की छाल के चूर्ण को चाय के साथ उबालकर ले सकते हैं. चाय बनाते समय एक चम्मच इस चूर्ण को डाल दें. इससे उच्च-रक्तचाप भी सामान्य हो जाता है.

अशोक:ऐसा कहा जाता है कि जिस पेड़ के नीचे बैठने से शोक नहीं होता, उसे अशोक कहते हैं. अशोक का पेड़ सदैव हरा-भरा रहता है. जिसपर सुंदर, पीले, नारंगी रंग फ़ूल लगते हैं. अशोक का वानस्पतिक नाम सराका इंडिका है. अशोक की छाल को कूट-पीसकर कपड़े से छानकर रख लें. इसे तीन ग्राम की मात्रा में शहद के साथ दिन में तीन बार सेवन करने से सभी प्रकार के प्रदर में आराम मिलता है. अशोक की छाल 10 ग्राम को 250 ग्राम दूध में पकाकर सेवन करें तो माहवारी सम्बंधी परेशानियां दूर हो जाती हैं. पतले दस्त होने के हालात में यदि पलाश का गोंद खिलाया जाए तो अतिशीघ्र आराम मिलता है. पलाश के बीजों को नींबूरस में पीसकर दाद, खाज और खुजली से ग्रसित अंगो पर लगाया जाए तो फ़ायदा होता है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और हेल्थ बेनिफिट रेसिपी की सलाह, हमारे एक्सपर्ट्स से की गई चर्चा के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, न कि व्यक्तिगत सलाह. हर व्यक्ति की आवश्यकताएं अलग हैं, इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही, कोई चीज उपयोग करें. कृपया ध्यान दें, Local-18 की टीम किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगी.

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Tags: Health benefit, Hindi news, Local18



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