नई दिल्ली. लोकोपायलट ट्रेन चलाता है, उसे इसके लिए लंबी ट्रेनिंग दी जाती है. यह बात तो समझ में आती है लेकिन अगर कोई यह कहे कि उसे लर्निंग ऑफ रोड की ट्रेनिंग भी दी जाती है तो थोड़ा अजीब सा लगेगा. और खटकने वाली बात यह है कि ट्रेनिंग न सिर्फ नए लोकोपायलट को दी जाती है, बल्कि पुराने को भी दी जाती है. आखिर यह ट्रेनिंग क्या होती है, बता रहे रेलवे के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी. आप भी जानिए-
रेलवे बोर्ड के रिटायर्ड मेम्बर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदीप कुमार बता रहे हैं कि लोकोपालयट के लिए यह खास ट्रेनिंग होती है. जो नए और पुराने सभी लोकोपायलट को उन स्थितियों में दी जाती है, जब कोई लोकोपायलट ज्वाइन करता है या फिर पुराना लोकोपायलट तीन माह से अधिक समय की छुट्टी से लौटा हो. इसका नाम लर्निंग ऑफ रोड है, लेकिन यह रोड पर नहीं दी जाती है. ट्रेनों के रूट पर दी जाती है.
अगर कोई तीन माह या इससे अधिक छुट्टी से लौटा है तो रेलवे के नियमों के अनुसार आशंका होती है कि ट्रैक संबंधी नियमों को कहीं भूल न गया हो या कोई भ्रम न हो गया हो. इस वजह से ये ट्रेनिंग दी जाती है. अगर वो बगैर ट्रेनिंग के ड्यूटी करना चाहेगा तो भी क्रू मैनेजमेंट सिस्टम उसकी ड्यूटी को स्वीकृत नहीं करेगा. इसलिए छुट्टी के बाद ड्यूटी अनिवार्य हेाती है.
ये भी है एक नियम
प्रदीप कुमार बताते हैं कि नियम के मुताबिक, जब कोई लोकोपायलट 48 घंटे से अधिक की छुट्टी से लौटता है तो उसे रात की ड्यूटी नहीं दी जाती है. दो दिन की छुट्टी के बाद लौटने पर यह आंशका रहती है कि रात में न सो पाया हो या फिर ठीक से नींद न ले पाया हो तो समस्या हो सकती है. ऐसे में रात में ट्रेन चलाते समय अगर लोकोपायलट को झपकी आ जाए तो हादसा हो सकता है. इस वजह से छुट्टी से आने के बाद पहली ड्यूटी दिन में जाती है, माना जाता है कि इसके बाद वो रात में ठीक से सो सकेगा, अगले दिन की ड्यूटी उसे रात में दी जा सकती है.
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FIRST PUBLISHED : January 10, 2024, 22:26 IST


