अयोध्या में श्रीराम ने लंबे समय तक राजपाट संभाला. फिर उनके गुरु वशिष्ठ और ब्रह्माजी ने उनको संसार से मुक्त होने का आदेश दिया. अश्विन पूर्णिमा के दिन श्रीराम ने सरयू किनारे जल समाधि लेकर महाप्रयाण किया. श्रीराम ने सभी की मौजूदगी में ब्रह्म मुहूर्त में सरयू नदी की ओर प्रस्थान किया. उनके पीछे भरत, शत्रुघ्न, उर्मिला, मांडवी और श्रुतकीर्ति ने भी जलसमाधि ले ली. लक्ष्मण पहले ही श्रीराम के आदेश पर जलसमाधि ले चुके थे. संभव है कि ये कथा आप में से ज्यादातर ने सुनी हो. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि भगवान राम के जलसमाधि लेने के बाद उनके दोनों बेटों लव और कुश का क्या हुआ? इसके अलावा बाकी सभी भाइयों के बच्चे कहां गए?
राम ने कुश को दक्षिण कौशल प्रदेश (अब छत्तीसगढ़) और लव को उत्तर कौशल का साम्राज्य सौंपा. इतिहासकारों के मुताबिक, राम ने कुश को दक्षिण कोसल, कुशस्थली (अब कुशावती) और अयोध्या राज्य सौंपा. वहीं, लव को पंजाब दिया गया. लव ने मौजूदा पाकिस्तान के लाहौर को अपनी राजधानी बनाया था. भरत के बेटे तक्ष को आज के तक्षशिला और पुष्कर को पुष्करावती (आज का पेशावर) का सिंहासन सौंपा. लक्ष्मण के बेटे अंगद को हिमाचल में अंगदपुर और चंद्रकेतु को चंद्रावती का राजा बनाया. मथुरा में शत्रुघ्न के बेटे सुबाहु और शत्रुघाती को भेलसा (विदिशा) के सिंहासन पर बैठाया.
कालिदास ने रघुवंश में बताया, कैसे बंटा साम्राज्य
राम के समय में भी कोशल राज्य उत्तर कोशल और दक्षिण कोशल में बंटा हुआ था. कालिदास के रघुवंश के मुताबिक, राम ने अपने बेटे लव को शरावती और कुश को कुशावती का राज्य दिया था. शरावती को श्रावस्ती मान लिया जाए तो लव का साम्राज्य उत्तर भारत में रहा होगा. वहीं, कुश का राज्य दक्षिण कोसल में होगा. कुश की राजधानी कुशावती आज के बिलासपुर जिले में थी. बता दें कि कोशल को राम की मां कौशल्या की जन्मभूमि माना जाता है. रघुवंश के मुताबिक, कुश को अयोध्या जाने के लिए विंध्याचल को पार करना पड़ता था. इससे साफ होता है कि उनका साम्राज्य दक्षिण कोशल में था.
श्रीराम ने राजपाट त्यागने से पहले अपने बेटे लव-कुश के साथ ही भरत, शत्रुघ्न और लक्ष्मण के बेटों को अलग-अलग जगह के सिंहासन सौंपे.
लाहौर से लव का क्या रहा है संबंध
श्रीराम के बेटे लव से राघव राजपूतों का जन्म हुआ. इनमें बड़गुजर, जयास और सिकरवारों का वंश चला. दूसरी शाखा सिसोदिया राजपूत वंश की थी. इनमें बैछला या बैसला और गहलोत या गुहिल वंश के राजा हुए. कुश से कुशवाह राजपूतों का वंश आगे बढ़ा. ऐतिहासिक तथ्यों के मुताबिक, लव ने लवपुरी की स्थापना की, जो अब पाकिस्तान का लाहौर है. यहां के एक किले में लव का मंदिर भी है. लवपुरी को बाद में लौहपुरी कहा गया. दक्षिण-पूर्व एशियाई देश लाओस, थाईलैंड का नगर लोबपुरी उनके नाम पर ही बसाए गए हैं.
कुश वंश में भी हुई थीं सीता
भगवान राम के बेटों में कुश के वंश में अतिथि, निषधन, नभ, पुण्डरीक, क्षेमन्धवा, देवानीक, अहीनक, रुरु, पारियात्र, दल, छल, उक्थ, वज्रनाभ, गण, व्युषिताश्व, विश्वसह, हिरण्यनाभ, पुष्य, ध्रुवसंधि, सुदर्शन, अग्रिवर्ण, पद्मवर्ण, शीघ्र, मरु, प्रयुश्रुत, उदावसु, नंदिवर्धन, सकेतु, देवरात, बृहदुक्थ, महावीर्य, सुधृति, धृष्टकेतु, हर्यव, मरु, प्रतीन्धक, कुतिरथ, देवमीढ़, विबुध, महाधृति, कीर्तिरात, महारोमा, स्वर्णरोमा, ह्रस्वरोमा, सीरध्वज का जन्म हुआ. कुश वंश के राजा सीरध्वज को एक बेटी, जिसका नाम उन्होंने सीता रखा.
राम के वशंज ने महाभारत कौरवों का साथ दिया
सूर्यवंश में कृति नाम के राजा ने अपने बेटे का नाम जनक रखा. कुश वंश से ही कुशवाह, मौर्य, सैनी, शाक्य संप्रदाय शुरू हुए माने जाते हैं. एक शोध के मुताबिक, कुश की 50वीं पीढ़ी में हुए शल्य ने महाभारत युद्ध में कौरवों का साथ दिया. राम के वंश में शल्य के बाद कई पीढ़ी हुईं. शाक्यवंश को भी श्रीराम का वंशज माना जाता है. मौजूदा सिसोदिया, कुशवाह, मौर्य, शाक्य, बैसला और गहलोत श्रीराम के वंशज हैं. जयपुर राजघराने की महारानी पद्मिनी और उनका परिवार कुश के वंशज है.
जयपुर राजघराने की राजकुमारी दीया श्रीराम के बेटे कुश की वशंज हैं.
राजस्थान के भवानी सिंह थे कुश के वशंज
महारानी पद्मिनी ने एक साक्षात्कार में कहा भी था कि उनके पति भवानी सिंह कुश के 307वें वंशज थे. 21 अगस्त 1921 को जन्मे महाराज मानसिंह ने तीन शादियां की थीं. मानसिंह की पहली पत्नी मरुधर कंवर, दूसरी किशोर कंवर और तीसरी पत्नी गायत्री देवी थीं. महाराज मानसिंह और मरुधर कंवर से हुए बेटे का नाम भवानी सिंह था. भवानी सिंह की शादी राजकुमारी पद्मिनी से हुई. दोनों से एक बेटी दीया कुमारी हैं. उनकी शादी नरेंद्र सिंह के साथ हुई है. दीया कुमारी के बड़े बेटे पद्मनाभ सिंह और छोटे बेटे लक्ष्यराज सिंह हैं.
ये मुस्लिम खुद को मानते हैं राम का वशंज
भारतवर्ष में कई राजा और महाराजाओं के पूर्वज श्रीराम थे. आज भी राजस्थान में कुछ मुस्लिम कुशवाह वंश से नाता रखते हैं. मुगल काल में इन सभी को धर्म परिवर्तन करके इस्लाम अपनाना पड़ा, लेकिन ये आज भी खुद को श्रीराम का वंशज मानते हैं. हरियाणा के मेवात में दहंगल गोत्र के लोग भगवान राम के वंशज हैं. वहीं, छिरकलोत गोत्र के मुस्लिम यदुवंशी माने जाते हैं. उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, दिल्ली समेत कई जगहों पर मुस्लिम गांव या समूह खुद को राम का वशंज कहते हैं. लखनऊ के एसजीपीजीआई के वैज्ञानिकों ने फ्लोरिडा और स्पेन के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर किए डीएनए आधारित शोध में पता लगाया कि उत्तर प्रदेश के 65 फीसदी मुस्लिम ब्राह्मण बाकी राजपूत, कायस्थ, खत्री, वैश्य और दलित हैं.
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FIRST PUBLISHED : January 20, 2024, 17:29 IST


