Ammonia Shortage: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर भारत की रसोई तक पहुंच रहा है. कच्चे तेल और गैल के बाद अब इसका प्रभाव कृषि क्षेत्र पर भी साफ दिख रहा है. खासकर कोल्ड स्टोरेज में इस्तेमाल होने वाली अमोनिया गैस के दाम बढ़ने से सब्जियों के भंडारण की लागत बढ़ गई है. इसका सीधा असर आलू समेत कई सब्जियों की कीमतों और किसानों की आमदनी पर पड़ने की आशंका है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं, अमोनिया की कमी से कौन सी कमी से महंगी हो सकती है और किसानों को कितना तगड़ा नुकसान हो सकता है?
कोल्ड स्टोरेज पर बढ़ा खर्च
कोल्ड स्टोरेज में तापमान बनाए रखने के लिए अमोनिया गैस बेहद जरूरी होती है. इसी के जरिए आलू और अन्य सब्जियों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जाता है. लेकिन हाल के दिनों में अमोनिया की कीमतों में तेज उछाल आया है. जानकारी के अनुसार अमोनिया गैस की कीमत करीब 75 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 110 रुपये प्रति तक पहुंच गई है. इस बढ़ोतरी ने कोल्ड स्टोरेज संचालकों की लागत को काफी बढ़ा दिया है. जब स्टोरेज महंगा होता है तो उसका असर सीधे किसानों और बाजार कीमतों पर पड़ता है.
ये भी पढ़ें-सरकार को सीधे भूसा कैसे बेच सकते हैं किसान? यूपी में 15 अप्रैल से शुरू होने जा रही खरीद
किसानों पर बढ़ रहा है दबाव
पहले से ही कम दाम और उत्पादन की चुनौतियों से जूझ रहे किसानों के लिए यह स्थिति और मुश्किल बन गई है. आलू को लंगे समय तक सुरक्षित रखने के लिए किसानों को कोल्ड स्टोरेज पर निर्भर रहना पड़ता है, लेकिन अब बढ़ती लागत उनकी कमाई पर असर डाल रही है. कोल्ड स्टोरेज संचालकों का कहना है कि गैस के महंगे होने के साथ-साथ बिजली और मजदूरी की लागत भी बढ़ रही है, जिससे भंडारण शुल्क बढ़ाने की नौबत आ सकती है. इसका सीधा बोझ किसानों पर पड़ेगा.
सप्लाई और कीमतों पर असर संभव
अगर कोल्ड स्टोरेज में आलू और दूसरी सब्जियां सुरक्षित नहीं रह पाई तो बाजार में उनकी कमी हो सकती है. ऐसे में कीमतों में तेजी आना तय माना जा रहा है. यही वजह है कि सरकार भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि सप्लाई प्रभावित न हो. कुछ मामलों में समय रहते अमोनिया की उपलब्धता सुनिश्चित कर सप्लाई चेन को बनाए रखने की कोशिश भी की गई है, जिससे बड़े नुकसान और महंगाई को टाला जा सके.
फर्टिलाइजर उत्पादन पर भी असर
मिडिल ईस्ट के हालात का असर सिर्फ कोल्ड स्टोरेज तक सीमित नहीं है. गैस आपूर्ति प्रभावित होने से देश में यूरिया उत्पादन भी घटा है. सामान्य स्तर की तुलना में उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है, हालांकि सरकार ने वैकल्पिक इंतजामों के जरिए सप्लाई को संतुलित रखने की बात कही है. गैस, एलएनजी और दूसरे इनपुट लागत बढ़ने से उर्वरकों की कीमतों और सब्सिडी पर भी दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर खेती की लागत पर पड़ेगा.
ये भी पढ़ें-Urea Shortage: किसानों की फसल को बचाने के लिए सरकार तैयार, यूरिया पर तैयार हुआ ‘मास्टर प्लान’


