Friday, February 27, 2026
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Analysis: ममता का किनारा, अखिलेश की राहें जुदा, पंजाब में भी नहीं बनी बात, क्‍या INDIA ने BJP को दे‍ दिया वॉकओवर?


नई दिल्‍ली. पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी का मुकाबला करने के लिए विपक्षी दलों ने पूरे शोर-शराबे के साथ  I.N.D.I.A गठबंधन का ऐलान किया. दक्षिण से पश्चिम और पूर्व से उत्तर तक बीजेपी के खिलाफ विपक्ष का महागठबंधन बनाने की घोषणा की गई लेकिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की मुखिया ममता बनर्जी की एक हुंकार से I.N.D.I.A गठबंधन तार-तार होता हुआ दिखाई दे रहा है. अब ये सवाल भी होने लगा है कि जिस विपक्षी महागठबंधन की बात हो रही थी, वो आखिर कहां और किस राज्य में हो रहा है.

विपक्षी गठबंधन में सबसे बड़ी भूमिका कांग्रेस की ही थी. कांग्रेस को अधिकांश राज्यों में वहां की बड़ी विपक्षी क्षेत्रीय पार्टियों के साथ समझौता करना था. मोटे तौर पर देखें तो चार ऐसे राज्य थे, जिनमें विपक्षी एकता बड़ी चुनौती माना जा रहा था. उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पंजाब और दिल्ली. इनमें से उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करना है तो पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के साथ. वहीं, दिल्ली और पंजाब में अभी हाल तक धुर विरोधी रहे अरविंद केजरीवाल के साथ. अब ऐसा लगने लगा है कि विपक्ष में अगर कांग्रेस का कहीं आसानी से समझौता हो सकता है, तो वो कुछ समय पहले तक सबसे मुश्किल दिखाई दे रहे अरविंद केजरीवाल के साथ ही होगा. हालांकि वो भी सिर्फ दिल्ली में ही. पंजाब में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में सहमति बन गई है कि दोनों दल अलग अलग ही चुनाव लड़ेंगे और किसी भी तीसरे दल को राज्य में मुख्य विपक्षी दल की भूमिका में खड़े होने का मौका नहीं देंगे.

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TMC बंगाल में 2 सीटें देने को तैयार
ममता बनर्जी के तेवरों से साफ है कि वो कांग्रेस नेतृत्व से नाराज हैं. ममता का कहना है कि वो एकला चलो रे कि राह पर निकल गई हैं. वही हैं, जो राज्य में बीजेपी के साथ लड़ रही है. कांग्रेस को लेकर उनकी नाराजगी का कारण है कि कांग्रेस की न्याय यात्रा उनके राज्य यानी पश्चिम बंगाल में पहुंचने वाली है और पार्टी नेतृत्व ने उनसे बात तक नहीं की है. पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी मुश्किल ये हैं कि तृणमूल कांग्रेस उसके लिए दो सीटों से ज्यादा छोड़ने को तैयार नहीं. साथ ही कांग्रेस की सहयोगी और I.N.D.I.A गठबंधन की साथी लेफ्ट को ममता बनर्जी फूटी आंख नहीं देखना चाहती. अगर ममता बनर्जी अपनी हठधर्मिता पर अड़ी रही और गठबंधन नहीं हुआ, तो 24 से पहले विपक्षी एकता के लिए ये सबसे बहुत बड़ा झटका होगा.

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यूपी में समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस को दिखाया आइना
अब आते हैं, उत्तर प्रदेश पर. सूबे में लोकसभा की अस्सी सीटे हैं. यहां कांग्रेस को समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करना है. लेकिन वहां भी बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ रही है, ये दिखाई नहीं दे रहा है. कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर दो दौर की बातचीत हो चुकी है. लेकिन सीटों की संख्या क्या रहेगी, इसे लेकर कोई क्लेरिटी नहीं है. बातचीत कांग्रेस के साथ चल रही थी और इस बीच समाजवादी पार्टी ने राष्ट्रीय लोकदल के साथ गठबंधन का औपचारिक ऐलान भी कर दिया और उन्हें सात सीटे देने की घोषणा भी कर दी. लेकिन कांग्रेस को कितनी सीटे मिलेंगी, क्या उन पर वो राजी होगी, इन सवालों के जवाब मिलना भी है बाकी.

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क्‍या केवल दिल्‍ली की 7 सीटों के लिए बना गठबंधन? 
बिहार, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, झारखंड ये कुछ ऐसे राज्य हैं, जहां कांग्रेस का पहले से ही स्थानीय दलों के साथ गठबंधन है. वहां पहले भी वर्तमान विपक्षी दल मिलकर चुनाव लड़ते रहे हैं और आगे भी लड़ते रहेंगे. हां, सीटों की संख्या कुछ इधर-उधर हो सकती है. हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, तेलंगाना जैसे कुछ राज्यों में कांग्रेस के साथ कोई गठबंधन होना नहीं, वहां पार्टी को अकेले ही चुनाव लड़ना है. अब ऐसी स्थिति में सवाल उठता है कि क्या सिर्फ दिल्ली की सात सीटों के लिए गठबंधन करने के लिए I.N.D.I.A गठबंधन की मुनादी हुई थी, क्योंकि पंजाब में गठबंधन होना नहीं, पश्चिम बंगाल में ममता दीदी एकला चलो रे की तरफ निकल गई हैं, उत्तर प्रदेश में भी अखिलेश कुछ अच्छी खबर कांग्रेस को दे नहीं रहे हैं.



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