Animal ambulance service: उत्तर प्रदेश में पशुपालकों को अब अपने बीमार पशुओं के इलाज के लिए अस्पताल के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. राज्य सरकार ने पशु एंबुलेंस सेवा शुरू की है, जिसके जरिए किसान घर बैठे ही पशु चिकित्सक की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं. इस सेवा के तहत एक कॉल पर डॉक्टर दवाई और जरूरी उपकरणों से लैस मोबाइल वेन सीधे पशुपालकों के दरवाजे तक पहुंचती है. इससे खास तौर पर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को बड़ी राहत मिल रही है. ऐसे में चलिए आज आपको बताते हैं कि अगर आपकी भी गाय या भैंस बीमार हो जाए तो आप कौन सा नंबर डायल करके एंबुलेंस बुला सकते हैं.
कैसे काम करती है पशु एंबुलेंस की सुविधा?
पशु एंबुलेंस सुविधा का लाभ उठाने के लिए पशुपालकों को केवल टोल फ्री नंबर 1962 डायल करना होता है. कॉल मिलने के बाद जीपीएस से लैस मोबाइल, बैटरी यूनिट तुरंत लोकेशन पर भेज दी जाती है. इस वैन में पशु चिकित्सा, सहायक स्टाफ और जरूरी दवाइयां के साथ इलाज की पूरी व्यवस्था होती है. इस सेवा से सरकार का उद्देश्य है कि पशुपालकों को अस्पताल ले जाने की बजाय इलाज को सीधे उनके पास पहुंचाया जाए.
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घर बैठे मिलेगी यह सुविधा
पशु एंबुलेंस सेवा किसी चलते-फिरते छोटे हॉस्पिटल की तरह काम करती है. इसमें कई तरह की सुविधा उपलब्ध कराई गई है. पशु चिकित्सा और सहायक स्टाफ इसमें उपलब्ध है. इसके अलावा जरूरी दवाइयां और उपचार उपकरण, छोटे ऑपरेशन की सुविधा, कृत्रिम गर्भाधान और बीमार पशुओं के लिए ड्रिप लगाने की व्यवस्था इसमें मिलती है. इसके अलावा वेन में जांच के लिए छोटा लैब सेटअप भी होता है. जहां खून, गोबर जैसे सैंपल की जांच की जा सकती है. इससे यह फायदा है कि पशुपालकों को अब अपने पशुओं को अस्पताल ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती. डॉक्टर और दवाइयां खुद उनके घर पहुंच जाती है. इससे समय की बचत होती है और पशुओं को भी परेशानी कम होती है. सरकार के अनुसार नॉर्मल इलाज की सुविधा मुफ्त दी जाती है, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इसका लाभ उठा सके.
टीकाकरण और नस्ल सुधार पर भी फोकस
यह सेवा केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि पशुओं को बीमारियों से बचाने पर भी जोर देती है. इसमें खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारियों के खिलाफ टीकाकरण, अन्य संक्रामक रोगों से बचाव और पशुओं की नस्ल सुधार के लिए कृत्रिम गर्भाधान जैसी सुविधाओं पर भी जोर देती है. इन सुविधाओं से पशुओं की सेहत बेहतर होने के साथ उत्पादन भी बढ़ता है. वहीं आपको बता दें जहां एक तरफ कहीं सेवाएं मुफ्त है, वहीं बड़े बड़े पशुओं के इलाज के लिए लगभग 150 रुपये प्रति पशुओं का मामूली शुल्क भी इस योजना में लिया जाता है.
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