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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) देशभर में स्कूल स्तर पर छात्रों के कौशल को बढ़ाने के लिए एक नई पहल शुरू कर रहा है। इसके तहत छठी, नौवीं और ग्यारहवीं कक्षा के छात्रों को खेल, व्याख्यान, संगोष्ठी सहित विभिन्न गतिविधियों में प्रदर्शन के आधार पर क्रेडिट स्कोर मिलेंगे। यह स्कोर स्नातक, परास्नातक और पीएचडी स्तर पर दाखिले के समय छात्रों के काम आएंगे।
सीबीएसई के कौशल शिक्षण के निदेशक डॉ. बिस्वजीत साहा ने बताया कि शैक्षणिक स्तर 2024-25 से राष्ट्रीय क्रेडिट ढांचे (एनसीआरएफ) को लागू किया जा रहा है। योजना से जुड़ने के बाद स्कूल कौशल शिक्षण से जुड़ी गतिविधियों के प्रदर्शन के आधार पर छात्रों को क्रेडिट स्कोर देंगे। यदि किसी छात्र ने छठी, नौंवी और ग्यारहवीं कक्षा में किसी खेल या अन्य गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है तो उस समय दिए गए क्रेडिट स्कोर स्नातक के दाखिले के समय उनके काम आएंगे। इसके साथ ही क्रेडिट को छात्रों के यूनिक आईडी नंबर के तहत स्वचालित स्थायी शैक्षणिक खाता रजिस्टरी (एपीएएआर) में भी जोड़ा जाएगा।
योजना से जुड़ने के लिए आवेदन करें डॉ. साहा ने बताया कि बोर्ड ने स्कूलों को इस पायलट प्रोजेक्ट से जुड़ने के लिए आमंत्रित किया है। 30 अप्रैल तक स्कूल में आवेदन दे सकते हैं। योजना से जुड़ने के लिए बोर्ड से संबद्ध स्कूल स्वतंत्र हैं, उनके लिए कोई अनिवार्यता नहीं है। मई और जून में गर्मियों की छुट्टियों के दौरान स्कूलों के साथ बैठकें होंगी। एनसीआरएफ को लागू करने के लिए स्कूलों के साथ कार्यशालाएं की जाएंगी। किसी भी स्कूल को यदि कोई सुझाव देना है या वह कोई अमूल परिवर्तन चाहता है तो उस पर विचार कर उसे प्रोजेक्ट में शामिल किया जाएगा।
प्रोजेक्ट सफल हुआ तो देशभर में होगा लागू शैक्षणिक सत्र 2024-25 के दौरान इस परियोजना को एक जुलाई तक तैयार कर आठ से नौ माह के लिए लागू किया जाएगा। सफल होने की परिस्थिति में इसे देशभर के स्कूलों में लागू किया जाएगा। इसका लाभ छात्रों के कौशल के साथ उनके शैक्षणिक गतिविधियों पर भी बेहतर तरीके से उल्लेखित होगा।
400 से अधिक स्कूलों के साथ बैठकें कीं
बोर्ड परीक्षा के दौरान फरवरी और मार्च में देश के 10 शहरों और सीबीएसई के विदेशों में स्थित स्कूलों के साथ प्रोजेक्ट के संबंध में बैठकें हुईं। इसके बाद 400 से अधिक स्कूलों के साथ कार्यशालाएं हुईं। फिर एनसीआरएफ को लेकर एक मूल ढांचा तैयार किया गया। इसे लागू करने के लिए स्कूलों के साथ कार्यशालाएं की जाएंगी।
अन्य गतिविधियों के प्रति विद्यार्थियों की रुचि बढ़ेगी
डॉ. साहा ने बताया कि मौजूदा समय में स्कूल स्तर पर 10वीं और 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर ही छात्रों का मूल्यांकन किया जाता है। इसके बाद स्नातक और परास्नातक में भी शिक्षण के प्रदर्शन पर आकलन होता है, लेकिन इसके लागू होने के बाद छात्रों का कौशल शिक्षण के आधार पर भी मूल्यांकन किया जाएगा। इससे छात्रों में खेल सहित अन्य गतिविधियों के प्रति रुचि बढ़ेगी।


