Chakbandi: ग्रामीण इलाकों में समय के साथ परिवार बढ़ने पर खेती की जमीन का बंटवारा होना आम बात है. पीढ़ी दर पीढ़ी जमीन छोटे-छोटे टुकड़ों में बट जाती है. जिससे खेती करना मुश्किल और महंगा हो जाता है. यही नहीं खेतों की सीमाओं को लेकर विवाद और सरकारी जमीन पर अतिक्रमण जैसी समस्याएं भी बढ़ने लगती है. ऐसी स्थिति में सरकार चकबंदी प्रक्रिया लागू करती है, जिसका मकसद बिखरी हुई जमीन को एक जगह समेटकर खेती को आसान बनाना होता है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि किसी गांव में चकबंदी कब होती है और क्या इसके लिए क्या किसान भी आवेदन कर सकते हैं.
कब होती है चकबंदी?
किसी गांव में चकबंदी तब कराई जाती है, जब वहां खेत छोटे-छोटे टुकड़ों में बट जाते हैं और खेती में दिक्कत बढ़ने लगती है. इसके लिए सबसे पहले ग्राम सभा प्रस्ताव देती है कि गांव में चकबंदी कराई जाए. इसके बाद चकबंदी विभाग के अधिकारी गांव का निरीक्षण करते हैं और रिपोर्ट तैयार करते हैं कि चकबंदी जरूरी है या नहीं. अगर रिपोर्ट सही पाई जाती है तो जिलाधिकारी के जरिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा जाता है. वहीं सरकार की मंजूरी मिलने के बाद अधिसूचना जारी होती है और चकबंदी की प्रक्रिया शुरू हो जाती है.
क्या किसान आवेदन कर सकते हैं?
चकबंदी सीधे किसी एक किसान के आवेदन पर नहीं होती, बल्कि पूरे गांव के स्तर पर लागू की जाती है. हालांकि किस ग्राम सभा के माध्यम से चकबंदी की मांग उठा सकते हैं. अगर गांव के लोग इस पर सहमति बनाते हैं, तो प्रस्ताव आगे भेजा जाता है.
कैसे शुरू हुई होती है चकबंदी की प्रक्रिया?
सरकार की ओर से अधिसूचना जारी होने के बाद गांव में चकबंदी समिति का गठन किया जाता है. जिसमें ग्राम प्रधान अध्यक्ष होता है. इसके बाद चकबंदी विभाग की टीम गांव में जाकर जमीन का सर्वे, नक्शा सुधार और रिकॉर्ड की जांच करती है. इस दौरान खेती की स्थिति, पेड़, कुए और सिंचाई के साधनों का आकलन किया जाता है. साथ ही खतौनी में मौजूद गलतियों को भी चिन्हित किया जाता है. इसके आधार पर जमीन की गुणवत्ता के हिसाब से उसका मूल्य तय किया जाता है. वही प्रारंभिक जांच के बाद किसानों को एक डॉक्यूमेंट दिया जाता है, जिसमें उनके खेत से जुड़ी पूरी जानकारी दर्ज होती है. अगर किसी किसान को इसमें कोई गलती लगती है, तो वह निर्धारित समय के अंदर आपत्ति दर्ज कर सकता है. आपत्तियों के निस्तारण के बाद संशोधित रिकॉर्ड तैयार किया जाता है और नई चकबंदी योजना बनाई जाती है.
नई जमीन का बंटवारा कैसे होता है?
चकबंदी योजना तैयार होने के बाद अधिकारियों की ओर से इसे अंतिम रूप दिया जाता है और किसानों को उनकी जमीन का कब्जा दिलाया जाता है. नई जमीन इस तरह दी जाती है कि पहले बिखरी हुई जमीन अब एक या कम जगहों पर मिल सके. अगर कोई किसान चकबंदी से संतुष्ट नहीं है, तो वह पहले चकबंदी अधिकारी के पास अपील कर सकता है. इसके बाद समाधान न मिलने पर उच्च अधिकारियों और बाद में न्यायालय का सहारा ले सकता है.
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