Colored Capsicum Farming: आज के समय में किसान अच्छा मुनाफा कमाने के लिए आम सब्जियों के साथ ही अलग-अलग तरह की सब्जियां भी उगाते हैं. खेती में बदलते समय के साथ फसलों का चुनाव भी बदल रहा है. अब किसान हर बार एक तरह की फसल की खेती की जगह ऐसी खेती की ओर रुख कर रहे हैं, जिसमें कम लागत में ज्यादा मुनाफा मिल सके.
रंगीन शिमला मिर्च भी ऐसी ही एक फसल बनकर उभरी है, जिसकी बाजार में लगातार मांग किसानों को आकर्षित कर रही है. हरी के साथ-साथ लाल और पीली शिमला मिर्च का इस्तेमाल घरों से लेकर होटल को और फास्ट फूड इंडस्ट्री तक बड़े पैमाने पर हो रहा है, जिससे इसकी कीमत भी बेहतर मिलती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि रंगीन शिमला मिर्च 60 से 70 दिन में तैयार हो जाती है और किसान इससे तगड़ा मुनाफा कैसे कमा सकते हैं.
कई किसान अब वह हर बार होने वाली खेती को छोड़कर शिमला मिर्च की खेती शुरू कर रहे हैं. इसे उन्होंने आय का मुख्य का सोर्स भी बना लिया है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, एक एकड़ में करीब 25,000 की लागत आती है, जिसमें बीज, खाद, दवाइयां और मजदूरी शामिल होती है. वहीं एक फसल से उन्हें करीब एक से डेढ़ लाख रुपये तक का मुनाफा होता है.
खेती का आसान तरीका
रंगीन शिमला मिर्च की खेती के लिए पहले नर्सरी तैयार की जाती है. इसके बाद खेत की अच्छी तरह जुताई कर, उसमें गोबर की खाद मिलाई जाती है. मेड बनाकर मल्चिंग विधि से पन्नी बिछाई जाती है और उसमें पौधों की रोपाई की जाती है. रोपाई के बाद सिंचाई और समय-समय पर खाद व कीटनाशक का छिड़काव जरूरी होता है. यह तकनीक खरपतवार को काम करती है और पौधे की बढ़ावार में मदद करती है. वहीं शिमला मिर्च की रोपाई के करीब 60 से 70 दिन बाद ही मिर्च की तुड़ाई शुरू हो जाती है. एक बार फसल तैयार होने के बाद करीब 3 से 4 महीने तक लगातार उत्पादन मिलता रहता है. सामान्य परिस्थितियों में एक हेक्टेयर से 200 से 250 क्विंटल तक उपज ली जा सकती है.
मौसम और मिट्टी का रखें ध्यान
एक्सपर्ट्स के अनुसार, 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान शिमला मिर्च के लिए सबसे उपयुक्त होता है. वहीं दोमट या बलुई दोमट मिट्टी, जिसमें पानी का निकास अच्छा हो इसकी खेती के लिए बेहतर मानी जाती है. मिट्टी का पीएच मान 6 से 7 के बीच होना चाहिए. वहीं, अच्छी पैदावार के लिए सही किस्म का चयन भी जरुरी होता है. प्रमुख किस्म में कैलिफोर्निया वंडर, येलो वंडर, अरका गौरव, अरका मोहिनी और अरका बसंत शामिल है. इन किस्म से बेहतर उत्पादन मिलता है और बाजार में उनकी मांग भी ज्यादा रहती है.
रंगीन शिमला मिर्च की बढ़ती मांग
कई एक्सपर्ट्स बताते हैं कि रंगीन शिमला मिर्च की मांग तेजी से बढ़ रही है. इसमें विटामिन ए, विटामिन सी के साथ कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटेशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. यही वजह है कि इसकी खपत लगातार बढ़ रही है और किसानों को इसके अच्छे दाम मिल रहे हैं.


