एक फरवरी को मोदी सरकार के कार्यकाल में अंतरिम बजट (Interim Budget) पेश किया जा रहा है लेकिन क्या आपके मन में भी यह विचार आया है कि यह इतना गोपनीय क्यों रखा जाता है. क्या आपको भी यह सोचकर हैरानी होती है कि वित्त मंत्रालय इसे ‘पूरी तरह से गोपनीय’ कैसे रखता है? केंद्रीय बजट तैयार करने की कवायद लंबी और साथ ही बेहद गोपनीय होती है. अधिकारियों को क्वारंटाइन में रखने से लेकर उनके मोबाइल फोन को जाम करने तक, वित्त मंत्रालय हरेक बयान को लीक होने से बचाने के लिए एकदम चौकस रहता है.
साल 2024 का इस साल का अंतरिम बजट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) पेश करने जा रही हैं. अब चूंकि यह अंतरिम बजट है, इसलिए इस साल होने वाले आम चुनावों के बाद नई सरकार कार्यभार संभालने के बाद पूर्ण बजट पेश करेगी. वैसे वित्त मंत्री कह चुकी हैं कि 1 फरवरी को कोई शानदार घोषणा नहीं होने वाली है लेकिन बावजूद इसके इसे हर बजट की तह पूरी तरह से गोपनीय रखा गया है. दरअसल, कई साल पहले बजट लीक हो गया था.
आजाद भारत के लिए पहला बजट (1947-1948) की घोषणा तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री सर आरके शनमुखम चेट्टी ने की थी. वह ब्रिटिश समर्थक जस्टिस पार्टी के नेता थे. बजट से कुछ पहले ब्रिटेन के राजकोष के चांसलर ह्यूग डाल्टन ने एक पत्रकार को कुछ जानकारी दी. ये भारत द्वारा प्रस्तावित टैक्स में परिवर्तनों को लेकर थी. यह बात संसद में बजट भाषण से पहले ही पब्लिश हो गई. इस पूरे मामले ने इतना तूल पकड़ा कि डाल्टन को बाद में अपना पद छोड़ना पड़ा था.
इसके बाद के सालों में भी एक बार और ऐसा ही कुछ हुआ जब कुछ हिस्सा बजट भाषण से पहले बाहर आ गया. साल 1950 में, केंद्रीय बजट का एक हिस्सा तब लीक हो गया जब राष्ट्रपति भवन में छपाई होने वाली थी. उस वक्त जॉन मथाई वित्त मंत्री थे. लीक के बाद बजट की छपाई राष्ट्रपति भवन की बजाय नई दिल्ली के मिंटो रोड में ट्रांसफर कर दी गई थी.
सरकार का सुपर सीक्रेट मिशन बजट ऐसे गुप्त रखा जाता है…
भारत सरकार तब से अब तक पूरे बजट को इतनी गोपनीयता के साथ रखती है कि यह इसकी पहचान बन गई है. इंटरनेट के वायरल जगत के समय और ैकिंग के तमाम खतरों के बीच यह सुनिश्चित करने के लिए बहुत कुछ किया जाता है कि बजट गोपनीय बना रहे. पिछले सात दशकों से भी अधिक समय में बजट लीक नहीं हुआ है. बता दें कि 1951 से 1980 तक बजट मिंटो रोड स्थित एक प्रेस में छपता था. तब पुराने संसद भवन में वित्त मंत्रालय की सीट, नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में एक सरकारी प्रेस स्थापित की गई थी.
बजट की घोषणा से कुछ सप्ताह पहले, यह पूरी टीम जो बजट के काम में लगी होती है, क्वारंटाइन में भेज दी जाती है. किसी से मिलना जुलना से लेकर किसी भी प्रकार की कोई बाहरी आवाजाही इस बिल्डिंग में भी नहीं होती है. इस दफ्तर में एंट्री और एग्जिट पर कड़ी सुरक्षा रखी जाती और जो लोग बजट बनाने में शामिल होते हैं, वे भी जांच के दायरे में रखे जाते हैं. यहां तक कि इन पर भी दिल्ली पुलिस की मदद से इंटेलिजेंस ब्यूरो उन पर कड़ी नजर रखता है. उनके फोन कॉल्स को भी ट्रैक किया जाता है.
100 अधिकारी, 10 दिन, न फोन, न बातचीत
बजट की तैयारी से जुड़े काम शुरू होने से पहले ही पारंपरिक हलवा समारोह हो जाता है. इसके बाद ही लॉक-इन पीरियड शुरू होता है. वित्त मंत्रालय के इस खास दफ्तर में कम से कम 100 अधिकारी ऐसे होते हैं जो कम से कम 10 दिनों से काम पर जुटे होते हैं. इस दौरान उनका बाहरी दुनिया से कोई संपर्क नहीं होता, यहां तक कि अपने परिवार से भी नहीं. किसी इमरजेंसी में, इन अधिकारियों के परिवार उन्हें एक खास नंबर पर मेसेज छोड़ सकते हैं लेकिन बातचीत एकदम नहीं कर सकते. सिर्फ वित्त मंत्री ही अधिकारियों से मुलाकात कर सकते हैं. हलवा समारोह के साथ शुरू होती हैं. मिठाई बंटने के बाद अधिकारी काम पर लग जाते हैं.
वित्त मंत्रालय के कर्मचारियों के अलावा, जिन लोगों को क्वारंटाइन कर बजट की तैयारी में लगाया जाता है, उनमेंकानून मंत्रालय के कानूनी विशेषज्ञ, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के अधिकारी और केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीईसी) के अधिकारी भी इस टीम में शामिल होते हैं.
.
Tags: Budget, Nirmala Sitaraman
FIRST PUBLISHED : February 1, 2024, 08:41 IST


