Farming: अश्वगंधा एक मेडिसिनल पौधा है जिसकी हमेशा से बाजार में काफी मांग रही है. इसका इस्तेमाल कई चीजों में किया जाता है जैसे आयुर्वेदिक दवाइयां, सप्लीमेंट्स और हर्बल प्रोडक्ट्स, खास बात यह है कि इसकी जड़, पत्ते, बीज सभी हिस्से बिकते और इस्तेमाल होते हैं, जिससे इसे उगाने वाले किसानों को काफी ज्यादा मुनाफा होता है. इसे उगाने में कम लागत आती है जबकि यह मुनाफा काफी अधिक देता है. आइए आज आपको इसकी खेती से जुड़ी सभी जानकारी देते हैं
अश्वगंधा की खेती के लिए मिट्टी और जलवायु
अश्वगंधा की खेती के लिए हल्की रेतीली मिट्टी की आवश्यकता होती है, जिसमें पानी अधिक समय तक न रुके. अश्वगंधा उगाने के लिए जलवायु भी काफी जरूरी होती है, इसके लिए शुष्क और गर्म जलवायु सबसे अच्छी मानी जाती है. अधिक पानी लगाना इसकी फसल को खराब कर सकता है. यह कम सिंचाई में ही काफी अच्छे से तैयार हो जाता है, इस वजह से इसे कम संसाधनों वाले किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प माना जाता है.
अश्वगंधा की बुवाई और देखभाल
अश्वगंधा की बुवाई आमतौर पर मानसून खत्म होने के बाद की जाती है. बीजों को सीधे खेत में छिड़ककर या कतार में बोया जा सकता है. शुरुआती समय में हल्की सिंचाई और खरपतवार को रोकना काफी जरूरी काम है. खरपतवार पौधे को उगते ही खराब कर सकता है. फसल को तैयार होने में 4 से 5 महीने का समय लगता है. अच्छे से देखभाल करने पर फसल की पैदावार काफी अच्छी होती है.
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बाजार में मांग और कमाई
अश्वगंधा की बाजार में काफी ज्यादा मांग है. इसकी जड़ें और पत्तियां बाजार में अच्छे दाम पर जाती हैं, खासकर आयुर्वेदिक कंपनियों में इसकी मांग काफी ज्यादा है. किसान सिर्फ 1 एकड़ खेती करके भी काफी ज्यादा लाभ कमा सकते हैं. सही तकनीक और बाजार की समझ के साथ यह खेती लाखों की कमाई का जरिया बन सकती है. आज के समय में काफी सारे किसान अश्वगंधा की खेती कर रहे हैं और अधिक लाभ के लिए वे सीधे आयुर्वेदिक कंपनियों को अपनी फसल बेच देते हैं.
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