Pumpkin Farming: कद्दू की खेती भारत में लंबे समय से किसानों के लिए फायदे का सौदा मानी जाती रही है. कम खर्च, ज्यादा पैदावार और बाजार में साल भर बनी रहने वाली मांग की वजह से यह फसल किसानों की आमदनी बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है. खासतौर पर नई और उन्नत किस्म के आने के बाद अब किसान कम जमीन में भी ज्यादा उत्पादन लेकर बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं. ऐसे में चलिए अब आप आपको बताते हैं कि अगर आप भी कद्दू की खेती करने की सोच रहे हैं तो खेत में कद्दू उगाने के लिए बढ़िया क्वालिटी के बीज कौन से होते हैं.
56 कद्दू और श्रीराम वैरायटी के बीज की मांग
किसानों के बीच 56 कद्दू वैरायटी की मांग तेजी से बढ़ रही है. यह किस्म खासकर ठंड के मौसम में उगाई जाती है और बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिलती है. इसकी खेती में लागत कम आती है, जबकि उत्पादन ज्यादा होता है. कई किसानों ने महज दो बीघा में इसकी खेती कर एक फसल से 60 से 70 हजार रुपये तक का मुनाफा कमाया है. इसके अलावा श्री राम वैरायटी भी किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है. इस किस्म में एक पौधे से करीब 50 कद्दू तक का उत्पादन मिल सकता है. खास बात यह है कि कद्दू की बेलों के साथ करेला की खेती भी की जा सकती है, जिससे एक ही खेत से दो फसल लेकर दोगुना मुनाफा कमाया जा सकता है.
मिट्टी और खेती का सही तरीका
कद्दू की अच्छी पैदावार के लिए रेतीली और दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. खेत में जल निकासी की अच्छी व्यवस्था होना जरूरी है. खेती शुरू करने से पहले खेत की दो से तीन बार गहरी जुताई की जाती है और गोबर खाद डालकर उसे समतल किया जाता है. इसके बाद मेड बनाकर बीजों की बुवाई की जाती है. कुछ दिनों बाद पौधों की सिंचाई की जाती है और करीब 40 से 50 दिनों में फसल तैयार होने लगती है. वहीं समय पर देखभाल और सही तकनीक अपनाने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों अच्छी होती है.
इन किस्म की भी कर सकते हैं खेती
अगर किसान बेहतर क्वालिटी की कद्दू उगाना चाहते हैं तो उन्हें उन्नत बीजों का चयन करना बहुत जरूरी है. देश में कद्दू की कई उन्नत किस्म उपलब्ध है जो ज्यादा उत्पादन देती है और बाजार में अच्छी कीमत भी दिलाती है. इनमें काशी हरित, पूसा विश्वास, काशी उज्जवल, अरका सूर्यमुखी और काशी धवन जैसी प्रमुख किस्म है. काशी हरित किस्म 50 से 60 दिनों में तैयार हो जाती है और इसके फल 3.5 से 5 किलो तक के होते हैं. वही पूसा विश्वास किस्म करीब 120 दिनों में तैयार होती है और प्रति हेक्टेयर 400 क्विंटल तक उत्पादन देती है. काशी उज्जवल किस्म के उत्पादकता भी अच्छी मानी जाती है. जबकि अरका सूर्यमुखी अपनी आकर्षक रंगत और हल्के वजन के कारण बाजार में ज्यादा पसंद की जाती है. काशी धवन किस्म खासकर पहाड़ी इलाकों के लिए उपयुक्त है और कम समय में ज्यादा उत्पादन देती है.
कद्दू की बुवाई का सही समय और देखभाल
उत्तर भारत में कद्दू की खेती साल में दो बार की जा सकती है. गर्मी की फसल के लिए फरवरी-मार्च और बरसात की फसल के लिए जून-जुलाई उपयुक्त माना जाता है. सही समय पर बुवाई और नियमित सिंचाई से बेहतर उत्पादन मिलता है. वहीं खरपतवार नियंत्रण के लिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई जरूरी है, जिससे पौधों की बढ़वार अच्छी होती है. साथ ही खाद और उर्वरकों का संतुलित इस्तेमाल भी पैदावार बढ़ाने में मदद करता है.


