Strawberry Cultivation per Bigha: आजकल किसान कई अलग-अलग तरह की खेती करके काफी मुनाफा कमा रहे हैं. दरअसल, बदलते समय के साथ खेती के तरीके भी बदल रहे हैं और किसान ऐसी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं, जिनसे कम समय में बेहतर आमदनी हो सके. इन्हीं फसलों में स्ट्रॉबेरी भी एक ऐसी फसल बन गई है, जिसकी बाजार में साल भर मांग बनी रहती है.
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स्ट्रॉबेरी की फसल मुख्य रूप से सर्दियों में उगाई जाती है और इसकी बुवाई सितंबर से अक्टूबर के बीच की जाती है. यह फसल करीब ढाई से 3 महीने में तैयार हो जाती है. मांग ज्यादा होने की वजह से किसानों को इसका अच्छा दाम मिलता है, जिससे यह फसल फायदे का सौदा साबित हो रही है.
एक बीघा स्ट्रॉबेरी की फसल में कितनी आती है लागत?
एक बीघे में स्ट्रॉबेरी की खेती करने में लगभग 20 से 25 हजार तक की लागत आती है. वहीं कई मामलों में पौधे, मल्चिंग और दूसरे संसाधनों के कारण लागत ज्यादा भी हो सकती है. बड़े स्तर पर खेती करने पर खर्च और बढ़ जाता है. खासकर जब प्लास्टिक मल्च, पैकेजिंग और पौधों की कीमत शामिल होती है.
कितना हो सकता है मुनाफा?
अगर मौसम अनुकूल रहे और फसल की सही देखभाल की जाए तो एक बीघे से डेढ़ लाख रुपये तक का मुनाफा आसानी से हो सकता है. कई किसान बताते हैं कि एक एकड़ में यह कमाई लाखों तक पहुंच सकती है. यही वजह है कि स्ट्रॉबेरी की खेती किसानों के लिए कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाला ऑप्शन बनती जा रही है.
कैसे करें स्ट्रॉबेरी की खेती?
स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू करने के लिए खेत की 2 से 3 बार अच्छी तरह जुताई की जाती है. इसके बाद खेत में गोबर की खाद और जरूरी पोषक तत्व मिलाकर जमीन को समतल किया जाता है. फिर मेड बनाकर उस पर मल्चिंग बिछाई जाती है. मल्चिंग से न सिर्फ नमी बनी रहती है, बल्कि जल भराव और फलों के सड़ने का खतरा भी कम हो जाता है. वहीं मल्चिंग शीट में थोड़ी-थोड़ी दूरी पर छेद करके पौधे की रोपाई की जाती है. पौधे लगाने के तुरंत बाद सिंचाई कर दी जाती है. ड्रिप इरीगेशन तकनीक को इसमें सबसे बेहतर माना जाता है. क्योंकि इससे पानी सीधे जड़ों तक पहुंचता है और पानी की बचत भी होती है. इसके अलावा स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. जिसका पीएच मान 5.0 से 6.5 के बीच हो. इस फसल के लिए 18 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान अनुकूल होता है, जिससे पौधों की ग्रोथ अच्छी होती है और उत्पादन भी बेहतर मिलता है.
स्ट्रॉबेरी की सही किस्म का चयन भी जरूरी
भारत में स्ट्रॉबेरी की कई किस्म उगाई जाती है, जिनमें स्वीट चार्ली, वाइब्रेंट और केमारोजा जैसी किस्में बहुत पॉपुलर है. यह किस्म बेहतर उत्पादन देने के साथ-साथ और आकार में भी अच्छी होती है. स्ट्रॉबेरी की फसल में जल भराव सबसे बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए खेती में पानी की निकासी की अच्छी व्यवस्था जरूरी है. साथ ही समय-समय पर खाद और पोषक तत्व देना भी जरूरी है. वहीं स्ट्रॉबेरी की खेती में कीट और रोग से बचाव के लिए उचित देखभाल करनी पड़ती है.


