नई दिल्ली. उत्तराखंड विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने वाला विधेयक पेश किया जा चुका है. गुजरात और मध्य प्रदेश में भी UCC लागू करने की तैयारी है. इन दोनों प्रदेशों में समान नागरिक संहिता को लागू करने की संभावनाओं पर मंथन चल रहा है. दूसरी तरफ, कोर्ट में भी UCC को लागू करवाने के लिए समय समय पर कानूनी लड़ाइयां लड़ी गई हैं. सुप्रीम कोर्ट इस मसले पर किसी भी तरह का निर्देश देने से इनकार करता रहा है. शाह बानो बेगम से लेकर सरला मुदगल बनाम यूनियन ऑफ इंडिया, जॉन वल्लामतम बनाम यूनियन ऑफ इंडिया जैसे कई केस में UCC का मुद्दा उठता रहा है. CJI डीवाई चंद्रचूड़ के समक्ष भी समान नागरिक संहिता से जुड़े मामले आ चुके हैं. सीजेआई चंद्रचूड़ की पीठ ने मामले में न्यायपालिका की भूमिका को स्पष्ट तौर पर रेखांकित किया था.
दरअसल, वर्ष 2021 से 2022 के बीच UCC को देशभर में लागू करवाने की नियत से सुप्रीम कोर्ट में ताबड़तोड़ 6 याचिकाएं दायर की गई थीं. इन याचिकाओं में तलाक, भरण-पोषण, गुजारा भत्ता जैसे कानूनों में एकरूपता लाने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी. इन याचिकाओं में संविधान के अनुच्छेद 15 (धर्म और लिंग के आधार पर भेदभाव की मनाही) का हवाला दिया गया था. याचियों की दलील थी कि समान कानून लागू न होना संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है. याचिका दाखिल करने वालों में भाजपा नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय, मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय के पूर्व वीसी फिरोज अहमद बख्त समेत अन्य लोग शामिल थे.
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सीजेआई चंद्रचूड़ की पीठ ने की थी सुनवाई
UCC को लागू करवाने की कोशिश के तहत सुप्रीम कोर्ट में 6 याचिकाएं दायर की गई थीं. पिछले साल मार्च में CJI डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ में इन सभी याचिकाओं पर सुनवाई हुई थी. सीजेआई चंद्रचूड़ ने इन सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए उनका निस्तारण कर दिया था. सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा था, ‘इस तरह के सभी मामले संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है.’ बता दें कि उत्तराखंड सरकार ने जब UCC को लागू करने से पहले इसके विभिन्न पहलुओं पर विचार करने के लिए विशेषज्ञ समिति का गठन किया था तो इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. शीर्ष अदालत ने जनवरी 2023 में इससे जुड़ी याचिकाओं को खारिज कर दिया था.

लॉ कमीशन का रुख
वर्ष 2016 में सरकार ने विधि आयोग (Law Commission) से UCC पर भी विचार करने का आग्रह किया था. केंद्र ने लॉ कमीशन से अनुरोध किया था कि वह इस बात का पता लगाए कि देश में मौजूद विभिन्न पर्सनल लॉ को खत्म कर कैसे समान संहिता को लागू किया जा सकता है. साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस बलबीर सिंह चौहान की अध्यक्षता वाले 21वें विधि आयोग ने इसपर अपनी रिपोर्ट सौंपी थी. विधि आयोग ने कहा था कि इस मौके पर समान नागरिक संहिता को अमल में लाने की जरूरत नहीं है. 22वें विधि आयोग ने विभिन्न पक्षों से यूसीसी पर उनकी राय मांगी थी.
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Tags: Supreme Court, Uniform Civil Code
FIRST PUBLISHED : February 7, 2024, 12:03 IST


