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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) 12 भारतीय भाषाओं में कला, विज्ञान, वाणिज्य और सामाजिक विज्ञान में स्नातक स्तर पर पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने पर काम कर रहा है। यूजीसी चेयरमैन एम जगदीश कुमार ने बताया कि हम राज्यों में नोडल विश्वविद्यालयों की पहचान कर रहे हैं,जो उन लेखकों की टीम बनाने की कवायद का समन्वय करेंगे जो भारतीय भाषाओं में उच्च गुणवत्ता वाली पाठ्यपुस्तकें लिख सकते हैं। यह प्रयास विश्वविद्यालयों में छात्रों को भारतीय भाषाओं में सीखने के अवसर प्रदान करने के राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लक्ष्य के अनुरूप है। यूजीसी की ओर से विभिन्न विषयों में स्नातक (यूजी) स्तर के पाठ्यक्रमों के लिए 12 भारतीय भाषाओं में मूल पाठ्यपुस्तकें लिखने के लिए इच्छुक लेखकों/आलोचकों और उच्च शिक्षा संस्थानों के संकाय सदस्यों को इच्छा जाहिर करने को कहा है। कला, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के लेखकों के पास आयोग को स्वीकृति भेजने और उपलब्ध फॉर्म के माध्यम से अपनी रुचि की अभिव्यक्ति (ईओआई) प्रस्तुत करने के लिए 30 जनवरी, 2024 तक का समय है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 12 जनवरी को इस संबंध में स्थानीय भाषाओं में पुस्तकें लिखने में रुचि रखने वाले शिक्षकों, एकेडमिक्स और लेखकों से 12 भारतीय भाषाओं में किताबें लिखने को आवेदन आमंत्रित किए हैं। यूजीसी ने लेखकों से स्नातक स्तर के कोर्सों जिसमें आर्ट्स, साइंस, कॉमर्स और सोशल साइंसेज शामिल हैं। इस संबंध में यूजीसी के सचिव मनीश जोशी ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों पत्र लिखकर लेखकों से आवेदन मांगे हैं।
अपने पत्र में प्रोफेसर जोशी ने 12 भारतीय भाषाओं – असमिया, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, तमिल, तेलुगु और उर्दू हैं।


