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सपना सच हो सकता है बशर्ते मंजिल पाने के लिए जुनून, जोश और जज्बा हो। यूपी की हेमा मांझी एक ऐसी ही बेटी है जिसके माता-पिता ईंट भट्ठा श्रमिक हैं और छोटी सी झोपड़ी में रहकर तमाम मुश्किलों से लड़कर सपना पूरा किया है। उसे अमेरिकी संस्था प्रिंसटन फाउंडेशन फेलोशिप फॉर पीस एंड लर्निंग 2023-24 ने अपनी फेलोशिप के लिए चुना है। यह संस्था हेमा के पढ़ने का खर्च उठाएगी। उसने सफलता का श्रेय विजया दीदी को दिया है। उसने उनके अनौपचारिक स्कूल में उसने पांचवीं तक पढ़ा। इसके बाद पढ़ाई कराने में भी विजया दीदी की मदद मिली। आज वह ब्रह्मावर्त पीजी कॉलेज, मंधना में स्नातक तृतीय वर्ष की छात्रा है।
पूर्व राष्ट्रपति आर वेंकटरमन की बेटी विजया रामचंद्रन ईंट भट्ठों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए अनौपचारिक शिक्षा के रूप में ‘अपना स्कूल’ का संचालन करती हैं। कानपुर से बिहार तक वह इन प्रवासी श्रमिकों के बच्चों की पढ़ाई कराती हैं ताकि उनकी अगली पीढ़ी पढ़ लिख कर आगे बढ़ सके। इन्हीं में शामिल रहीं हेमा मांझी चौबेपुर के अमिलिया गांव में ईंट भट्टे के करीब एक झोपड़ी में रहती है।
पढ़ाई का खर्च संस्था उठाएगी
प्रिंसटन फाउंडेशन फेलोशिप फॉर पीस एंड लर्निंग 2023-24 एक अमेरिकी संस्था है। यह शैक्षिक क्षेत्र में गरीब बच्चों को आगे बढ़ाने में मदद करती है। संस्था परीक्षा लेती है और फिर साक्षात्कार पास करने वाले को फेलोशिप देती है। हेमा उन सौभाग्य़शाली छात्राओं में है जिसे फेलोशिप के लिए चुना गया है। अब पढ़ाई का खर्च यह संस्था उठाएगी। स्नातक तृतीय वर्ष की फीस दी है। परास्नातक का खर्च भी देगी। इंटर्नशिप के लिए उसे अमेरिका जाने का अवसर भी मिल सकता है।
मैं शिक्षिका बनकर दिखाऊंगी
हेमा कहती हैं कि हमारा परिवार बहुत गरीब है। झोपड़ी में संसाधन संभव नहीं हैं। हमारी तो विजया दीदी और संगीता दीदी ने हेल्प की तो हम इतना पढ़ गए। हमारा परिवार ईंट भट्ठे पर काम खत्म होने के बाद बिहार नवादा चला जाता है। इस परिवार में वह अकेली है जिसने पढ़ाई शुरू की और यहां तक पहुंच गई। वह कहती है कि अपनी पढ़ाई पूरी कर शिक्षिका बनूंगी। अभी भी कॉलेज से आने के बाद अपना स्कूल में बच्चों को पढ़ाती हूं।


