Tuesday, February 10, 2026
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UPSC success story IAS DM Vandana Singh Chauhan is in the news after violence broke out in Haldwani Uttarakhand – ये लड़की पहले अटेम्प्ट में UPSC CSE क्लियर कर ऐसे बनी थी IAS अधिकारी, तैयारी के लिए अपनाया था अनोखा तरीका, Education News


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UPSC success story: इंदिरा नगर के बनभूलपुरा मोहल्ले में पुलिस द्वारा एक मदरसे को हटाने की कोशिश के बाद हिंसा भड़क उठी, जिससे उत्तराखंड के हलद्वानी में तनाव बढ़ गया। नैनीताल की जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) वंदना सिंह चौहान अशांति को समाप्त करने की प्रभारी हैं क्योंकि यह क्षेत्र नैनीताल जिले का हिस्सा है। आइए ऐसे में जानते हैं, IAS अधिकारी वंदना सिंह चौहान के बारे में। कैसे की थी यूपीएससी की तैयारी।

यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) की ओर से आयोजित सिविल सर्विसेज एग्जामिनेशन (CSE) की परीक्षा की तैयारी में कई सालों की मेहनत लग जाती है। कुछ ही ऐसे उम्मीदवार होते हैं, जो इस परीक्षा को पास करने में कामयाब रहते हैं और IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा कर लेते हैं।  हरियाणा के नरसुल्लाहगढ़ की वंदना सिंह चौहान उन्हीं उम्मीदवारों में से एक हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत के दम पर UPSC CSE की परीक्षा पहले ही प्रयास में पास की थी।

वंदना का जन्म 4 अप्रैल 1989 को हरियाणा में एक ऐसे परिवार में हुआ था जो लड़कियों की शिक्षा को महत्व नहीं देता था। वंदना शुरू से काफी होशियार थी और आगे पढ़ना चाहती थी। जहां तमाम रिश्तेदार उनकी पढ़ाई को लेकर नाखुश थे, वहीं उनके माता- पिता ने बेटी को आगे पढ़ाने की बेहतरीन भूमिका निभाई। स्कूल और कॉलेज के दौरान वंदना को उन रिश्तेदारों के विरोध का सामना करना पड़ा था जो उनके पढ़ाई- लिखाई को छुड़वाना चाहते थे। बता दें, उनके पिता ने परिवार की इच्छा के विरुद्ध जाकर वंदना का दाखिला उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक गुरुकुल करवाया था। घर से दूर जाकर पढ़ाई के लिए उनके दादा-दादी, चाचा और चाची असहमत थे, तब भी उनके पिता ने ठान लिया था कि बेटी आगे खूब पढ़ाई करेगी।

इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद वंदना ने लॉ की पढ़ाई और यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी। बता दें, उन्होंने आगरा में अम्बेडकर विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था। जिसके बाद उन्होंने कॉलेज के साल घर पर बिताने का फैसला किया, क्योंकि वह जानती थी कि यूपीएससी की तैयारी के लिए कई घंटों तक पढ़ाई करनी पड़ती है।

वंदना ने हर दिन लगभग 12 से 14 घंटे पढ़ाई की। वह यूपीएससी सीएसई को लेकर काफी गंभीर थी। एक इंटरव्यू में वंदना की मां मिथिलेश ने बताया था कि वंदना गर्मियों में भी रूम कूलर का इस्तेमाल करने से बचती थीं क्योंकि ठंड के मौसम में उन्हें नींद ज्यादा आती थी। ऐसा करने से उनके पास पढ़ने का और समय मिल जाता था। बता दें, उन्होंने अपनी मेहनत और लगने के दम पर साल 2012 में यूपीएससी  सीएसई की परीक्षा में रैंक 8 हासिल की थी। उन्होंने हिंदी मीडियम से इस परीक्षा को पास किया था।

 

 



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