Urea Shortage: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग का सीधा असर अब भारत के खेतों तक पहुंच रहा है. खाद की सप्लाई पर संकट गहराने के बाद भारत सरकार एक्टिव मोड में आ गई है और यूरिया की उपलब्धता बनाए रखने के लिए मास्टर प्लान तैयार किया है. जानकारी के मुताबिक, भारत सरकार ने 25 लाख मीट्रिक टन यूरिया खरीदने के लिए ग्लोबल टेंडर तक निकाला है.
बता दें, भारत दुनिया का सबसे बड़ा यूरिया आयातक देश है. मिडिल ईस्ट से भारत के यूरिया और DAP – डाइअमोनियम फॉस्फेट आयात का करीब 50 फीसदी हिस्सा आता है, जिसमें सऊदी अरब सबसे बड़ा DAP सप्लायर और ओमान सबसे बड़ा यूरिया सप्लायर है. ईरान युद्ध की वजह से इस सप्लाई चेन पर सीधा असर पड़ा है.
यूरिया और DAP- खेती की रीढ़
यूरिया वो खाद है जो फसल को नाइट्रोजन देती है, यानी पौधे को तेजी से बढ़ने की ताकत. बुवाई के तुरंत बाद किसान इसे खेत में डालते हैं ताकि जड़ें मजबूत हों और पैदावार अच्छी हो. धान, गेहूं, मक्का, गन्ना लगभग हर फसल में यूरिया पहली जरूरत होती है. वहीं, DAP यानी डाइअमोनियम फॉस्फेट में नाइट्रोजन के साथ फॉस्फोरस भी होता है जो बीज को अंकुरित होने और जड़ों को विकसित होने में मदद करता है. इसीलिए DAP को बुवाई से पहले मिट्टी में मिलाया जाता है. यूरिया और DAP मिलकर भारतीय खेती की रीढ़ हैं.
सरकार की ओर से जारी किया गया बड़ा टेंडर
सरकारी कंपनी इंडियन पोटाश लिमिटेड – IPL ने शनिवार को टेंडर जारी किया. इसमें 15 लाख टन यूरिया पश्चिमी तट से और 10 लाख टन पूर्वी तट से मंगाने की योजना है. बोलियां 15 अप्रैल तक जमा होनी हैं और जून 14 तक शिपमेंट रवाना होनी चाहिए. यह टेंडर इसलिए भी जरूरी है क्योंकि जून में मानसून की दस्तक के साथ धान, मक्का और सोयाबीन की बुवाई शुरू होती है और उस वक्त यूरिया की मांग एकदम से बढ़ जाती है.
भारत के पास फिलहाल पर्याप्त स्टॉक
केमिकल्स और फर्टिलाइजर मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव अपर्णा शर्मा ने मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि भारत के पास फिलहाल पर्याप्त स्टॉक है. ग्रीष्मकालीन फसल सीजन के लिए करीब 3.9 करोड़ मीट्रिक टन खाद की जरूरत होगी और अभी स्टॉक 1.8 करोड़ टन के करीब है जो पिछले साल 1.47 करोड़ टन था. मंत्रालय के मुताबिक भारतीय कंपनियों ने रूस, मोरक्को, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, जॉर्डन, कनाडा, अल्जीरिया, मिस्र और टोगो जैसे देशों से लॉन्ग-टर्म डील साइन की हैं. रूस से 28 लाख टन की सप्लाई केप ऑफ गुड होप रूट से आएगी. फरवरी में भी 13 लाख टन यूरिया के लिए ग्लोबल टेंडर निकाला गया था.
घरेलू उत्पादन भी कम
एक और चिंता की बात यह है कि भारत में यूरिया का मासिक उत्पादन अभी 18 लाख टन है जबकि सामान्य रूप से यह 24 लाख टन होता है. कुछ प्लांट सालाना मेंटेनेंस के बाद अभी दोबारा चालू हो रहे हैं. इसके अलावा भारत अपनी LNG जरूरत का करीब 50% मिडिल ईस्ट से पूरा करता है और LNG यूरिया बनाने का अहम कच्चा माल है.
यह भी पढ़ें: इस राज्य में गेहूं की खरीद पर किसानों को मिल रहा सबसे ज्यादा दाम, MSP के साथ 150 रुपये का बोनस


