Monday, December 15, 2025
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जीतन राम मांझी ने लगाई ‘शिक्षक अभ्यर्थी अदालत’, कहा-फिजूल की वाहवाही ले रही नीतीश सरकार, बिहारियों से धोखा हुआ


हाइलाइट्स

जीतन राम मांझी ने नीतीश सरकार के खिलाफ लगाई शिक्षक अभ्यर्थी अदालत.
सुनवाई में एकत्रित समस्याओं को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास भेजेंगे मांझी.
जीतन राम मांझी ने कहा कि नीतीश सरकार से समस्याओं का निराकरण कराएंगे.

पटना. हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा सेकुलर पार्टी के संस्थापक संरक्षक सह पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने गुरुवार को अपने पटना स्थित आवास पर शिक्षक अभ्यर्थी अदालत का आयोजन किया. 12 M स्टैंड रोड में, हम के संरक्षक जीतन राम मांझी एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पूर्व मंत्री बिहार सरकार डा संतोष कुमार सुमन की उपस्थिति में शिक्षक अभ्यार्थी अदालत में सैकड़ों अभ्ययर्थियों ने भाग लिया. इसमें सभी अभ्यर्थियों ने अपनी-अपनी समस्याएं सुनाईं. सभी अभ्यर्थियों की समस्या को ध्यानपूर्वक सुनने के बाद मीडियाकर्मियों से बात करते हुए मांझी ने कहा कि शिक्षक नियुक्ति में बहुत सारी त्रुटियां पाई गई हैं. बहुत सारे अभ्यार्थी ऐसे आए थे जिनका कटऑफ लिस्ट से ज्यादा नंबर रहने के बाद भी चयन नहीं हो पाया है. आरक्षण रोस्टर का पालन नहीं किया गया है.

जीतन राम मांझी ने आरोप लगाते हुए कहा किसी भी परीक्षा के प्रवेश पत्र जारी होने से पहले उसके आवेदन पत्र की जांच की जाती है उसके बाद प्रवेश पत्र जारी किया जाता है, और यहां पर अभ्यार्थी का अंतिम रूप से चयन होने के बाद पैरवी वाले लोगों का आवेदन सुधारा जा रहा है. इधर आयोग कह रहा है कि एक लाख बीस हजार तीन सौ छत्तीस (120336) अभ्यार्थी सफल हुए थे, उसमें से दस हजार (10000) अभ्यार्थी अयोग्य पाए गए हैं. इधर, सरकार एक लाख बीस हजार तीन सौ छत्तीस(120336) शिक्षकों की नियुक्ति पत्र बाटने की ढिंढोरा पीट रही है. ऐसे में सरकार ये बताए कि ये दस हजार (10000) शिक्षक कहां से किस फर्जीवाड़ा से ला रही है?

मांझी ने आगे कहा, 120336 शिक्षकों की नियुक्ति में बाहरी राज्य के 18000, जबकि पहले से नियोजित शिक्षक करीब-करीब 48000 हैं. मोटा-मोटी 20000 के करीब में नए शिक्षक नियुक्त किए गए फिर भी सरकार अपना पीठ थपथपाते हुए वाहवाही लूटने में 120336 शिक्षकों की भर्ती की बात कर रही है. यह आंकड़ा बिल्कुल ही बिहार की जनता के साथ धोखा देने जैसा है. जबकि, एनडीए की सरकार में तीन लाख सत्तर हजार (370000) बिहारियों को सरकारी नौकरी दी गई थी, तब इतना उस समय की सरकार ढिंढोरा नहीं पिटी थी.

जीतन राम मांझी ने लगाई 'शिक्षक अभ्यर्थी अदालत', कहा-फिजूल की वाहवाही ले रही नीतीश सरकार, बिहारियों से धोखा हुआ

सभी अभ्यर्थियों की समस्याएं सुनने के बाद मांझी ने कहा कि इन सभी मामलों को आयोग और मुख्यमंत्री के पास भेजेंगे और इसका निराकरण भी कराएंगे. अगर सरकार इन सभी त्रुटियों का सुधार नहीं करती है तो हमारी पार्टी सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेगी. आगे मांझी जी ने प्रेस के सामने अपनी निम्न मांगें रखी (1) Sc/ST/EBC/BC की तरह बिहार के दिव्यांग को भी आरक्षण का लाभ दिया जाए. (2)यदि दिव्यांग प्रमाण पत्र नहीं है तो और सामान्य कोटि में चयन की योग्यता रखते है तो वैसे दिव्यांग अभ्यार्थी का चयन सामान्य कोटि में किया जाए. (3)प्राथमिक विद्यालय(1-5 वर्ग)में रिक्त 3142 पद है जो Sc महिला कोटे का है उन्हें Sc कोटा के पुरुष कोटे से भरा जाए.

मांझी ने आगे अपनी चौथी मांग में कहा कि (4) उर्दू विषय में वर्ग 1 से 5 में 4932 पद रिक्त है जबकि कई लोग कटॉफ से ज्यादा अंक प्राप्त किए हैं, उनका रिजल्ट नहीं आया है. (5) दिव्यांग में सफल अभ्यर्थियों का मेडिकल जांचोपरांत ही योगदान कराया जाए. (6) कई अभ्यर्थी ऐसे हैं जिन्हें कटऑफ से अधिक अंक हैं और क्वालीफाइंग पेपर में भी पास हैं, पर उन्हें असफल होने का कोई कारण नहीं बताया गया है. उन लोगों को असफल होने का कारण बताया जाए. (7) PGT केमिस्ट्री में 75%रिक्ति के लिए 39 मार्क्स समान वर्ग के लिए निर्धारित किया गया था, जबकि दूसरे सब्जेक्ट के लिए 48 अंक निर्धारित था ऐसा क्यों?

Tags: Bihar News, Bihar Teacher, Former CM Jitan Ram Manjhi, Nitish Government



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