Saturday, July 25, 2026
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अपने फॉर्म हाउस में ऐसे करें स्ट्रॉबेरी की खेती, 90000 की सब्सिडी दे रही सरकार


Subsidy On Strawberries Cultivation: आजकल मार्केट में स्ट्रॉबेरी की डिमांड इतनी ज़्यादा है कि लोकल मंडियों से लेकर बड़े-बड़े सुपरमार्केट्स, बेकरीज़ और आइसक्रीम ब्रांड्स में इसकी हमेशा शॉर्टेज ही रहती है. बच्चों से लेकर यूथ तक हर कोई इसे पसंद कर रहा है. जिसकी वजह से इसके दाम मार्केट में हमेशा हाई रहते हैं. अगर आपके पास फार्म हाउस या खाली पड़ी ज़मीन है. 

तो स्ट्रॉबेरी की खेती आपके लिए एक बढ़िया बिजनेस बन सकता है. इसी को देखते हुए यूपी सरकार के उद्यान विभाग ने इस पर 40% तक यानी करीब 90000 रुपये प्रति हेक्टेयर की भारी सब्सिडी देने का ऐलान किया है. जान लें कैसे ले सकते हैं इस सब्सिडी का फायदा. 

सब्सिडी पाने के लिए एलिजिबिलिटी 

योजना में पहले आओ, पहले पाओ के बेसिस पर हो रहा है. इसलिए समय रहते इसके लिए अप्लाई करना बहुत जरूरी है. डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन कंप्लीट होने के बाद सब्सिडी का अमाउंट डायरेक्ट-टू-बैंक ट्रांसफर के ज़रिए सीधा आपके अकाउंट में भेज दिया जाता है. जिससे किसी बिचौलिए की कोई गुंजाइश नहीं बचती.

अप्लाई करने का प्रोसेस

इस 90000 रुपये की सरकारी मदद का फायदा उठाने के लिए सबसे पहले आपको उद्यान विभाग की ऑफिशियल वेबसाइट dbt.uphorticulture.in पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होगा. अप्लाई करते टाइम आपके पास आधार कार्ड, बैंक अकाउंट पासबुक, जमीन के कागज़ात जैसे खसरा-खतौनी और पासपोर्ट साइज फोटो जैसे बेसिक डॉक्यूमेंट्स होने चाहिए. 

यह भी पढ़ें: प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों की बल्ले-बल्ले, प्रति एकड़ 4000 देगी सरकार

स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए सही तरीका

फार्म हाउस में स्ट्रॉबेरी उगाने के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे बढ़िया मानी जाती है, जिसका pH लेवल 5.5 से 6.5 के बीच होना चाहिए. ड्रिप इरिगेशन और प्लास्टिक मल्चिंग टेक्निक का यूज़ करके आप पानी की बचत के साथ-साथ खरपतवार को भी रोक सकते हैं. सितंबर से नवंबर का टाइम इसकी प्लांटिंग के लिए एकदम परफेक्ट होता है. एक बार पौधे लगाने के बाद लगभग 40 से 50 दिनों में फ्रेश स्ट्रॉबेरीज तैयार होने लगती हैं. 

इतना हो सकता है मुनाफा

मार्केट में ऑर्गेनिक और हाई-क्वालिटी स्ट्रॉबेरी की डिमांड हमेशा हाई रहती है, जिससे यह लोकल मार्केट्स, सुपरमार्केट्स और ऑनलाइन ग्रॉसरी ऐप्स पर काफी महंगे दामों में बिकती है. कम लागत और सरकारी सब्सिडी की मदद से किसान प्रति एकड़ करीब 3 से 5 लाख रुपये तक का तगड़ा नेट प्रॉफिट आसानी से कमा सकते हैं.

यह भी पढ़ें: किसान हरी भिंडी की जगह अपनाएं लाल भिंडी की खेती, बाजार में है खास डिमांड



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